समितियों ने बढ़ाया हौसला, पौधरोपण से दिया पर्यावरण का संदेश

बाराबंकी। बदलते समय में बच्चों को केवल पुस्तक आधारित शिक्षा ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की समझ भी जरूरी है। स्वरोजगार की भावना, लेन-देन का ज्ञान और आत्मनिर्भरता तभी विकसित होती है जब बच्चों को सीखने के साथ अनुभव करने का अवसर मिले। इसी सोच को साकार करते हुए
प्राथमिक विद्यालय माती में बाल दिवस पर आयोजित बाल मेले ने बच्चों के भीतर बसे नन्हे उद्यमी को न सिर्फ जागृत किया, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास से भी भर दिया।
बंकी ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय माती में बाल दिवस के अवसर पर मेले की शुरुआत उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। बच्चे अपनी-अपनी दुकानों को छोटे-छोटे व्यवसायियों की तरह सजाकर बैठे थे—कहीं खिलौनों की दुकान, कहीं चाय, बिस्कुट , पकौड़ा और नमकीन का स्टॉल, तो कहीं हस्तनिर्मित वस्तुओं का कोना। जैसे ही मेले में भीड़ बढ़ी, बच्चों की आवाज़ें गूंज उठीं, आइए, खरीदिए सबसे सस्ता, सबसे अच्छा!
दर्शक और अभिभावक भी बच्चों की इस उद्यमिता को देखकर प्रभावित हुए। सबसे खास बात यह रही कि कई बच्चों ने अपनी लागत से दोगुनी कमाई कर सभी को चौंका दिया। छोटे हाथों से पैसा संभालते और ग्राहकों से बातचीत करते बच्चों का आत्मविश्वास देखते ही बनता था। मेले में उपस्थित शिक्षकों ने बताया कि बच्चों को लाभ-हानि का सीधा अनुभव मिला और यही सीख भविष्य में उनके लिए मील का पत्थर साबित होगी। समारोह के दौरान स्वामी गंगाराम दास मानव उत्थान सेवा समिति की सचिव डॉ. प्रीति यादव ने कहा कि “बच्चों में स्वरोजगार की ललक तभी विकसित होगी जब वे खुद करके सीखें। यह मेला बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” समिति की टीम ने भी बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए 120 बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी और गणित की कापियों का सेट, साथ ही पेंसिल, रबर और कटर से भरा पाउच उपहार स्वरूप दिया। उपहार पाकर बच्चों के चेहरों पर जो चमक आई, उसने पूरे कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया। समिति की सदस्य डॉ. सुमन यादव और शशि वर्मा भी पूरे समय बच्चों का मनोबल बढ़ाती रहीं। वहीं, कार्यक्रम में एक और सराहनीय पहल हुई। सदा शिव कल्याण समिति की प्रबंधक श्रीमती कविता निगम और उनकी टीम ने विद्यालय में औषधीय पौधों का रोपण किया। उन्होंने बच्चों को पौधों के औषधीय गुणों, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ हवा के महत्व के बारे में सरल भाषा में समझाया। बच्चों ने भी पौधों की देखभाल का संकल्प लिया। मेले में विद्यालय के प्रधानाध्यापक जनार्दन प्रसाद यादव, आलोक राय, संजय कुमार, आनन्द प्रताप सिंह, नीतिका वर्मा, नीलू सागर, तथा आंगनवाड़ी कार्यकत्री अपर्णा वर्मा सहित अनेक शिक्षक और अभिभावक मौजूद रहे। सभी ने बच्चों की रचनात्मकता, ऊर्जा और सीखने के जुनून की सराहना की। बाल मेले ने बच्चों को न सिर्फ व्यापार की बुनियादी जानकारी दी, बल्कि उनके भीतर जिम्मेदारी, संचार कौशल और आत्मनिर्भरता का भाव भी पैदा किया जो किसी भी शिक्षा प्रणाली का वास्तविक उद्देश्य है।

मंडल ब्यूरो चीफ अयोध्या तेज बहादुर शर्मा/रामानंद सागर।

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