वाराणसी से सहायक ब्यूरो सलीम समाज

वाराणसी।सेवापुरी विकासखंड के बरनी गांव के कई मजदूरों को महाराष्ट्र के उस्मानाबाद ज़िले के परांडा खासगांव में बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया गया। ये सभी मजदूर बनवासी समुदाय से आते हैं, जिन्हें 5–6 महीने पहले मजदूरी का लालच देकर वहां ले जाया गया था। स्थानीय समाजसेवी संस्था समाज उत्थान सेवा समिति को जब इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने युवा फाउंडेशन की अध्यक्ष सीमा चौधरी से मदद मांगी। सीमा चौधरी की त्वरित पहल के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और मजदूरों को आज़ादी मिल सकी।जानकारी के अनुसार, बरनी गांव के मजदूरों को ठेकेदार बाबा ने पुरुषों को ₹700 व महिलाओं को ₹600 प्रतिदिन मजदूरी देने का आश्वासन देकर महाराष्ट्र भेजा था। लेकिन वहां पहुंचने के बाद मजदूरों को सुबह 3 बजे से दोपहर 3 बजे तक गन्ने के खेतों में काम कराया जाता था और बदल में मात्र ₹200–₹250 प्रतिदिन दिए जाते थे। विरोध करने पर मारपीट की घटनाएं भी सामने आईं।पीड़ित मजदूर इंदु ने बताया कि उन्हें बेहद कठिन परिस्थितियों में काम कराया जाता था और किसी भी प्रकार की स्वतंत्रता नहीं थी। मजदूर लवकुश के अनुसार, उन्हें बाहर जाने की अनुमति तक नहीं दी जाती थी और विरोध पर धमकियां दी जाती थीं।किसी तरह मजदूरों ने युवा फाउंडेशन से संपर्क किया। सूचना मिलते ही सीमा चौधरी ने तुरंत अन्ना हजारे कार्यालय एवं महाराष्ट्र प्रशासन से संपर्क साधा। लगभग 5–6 दिनों की कार्रवाई के बाद सभी मजदूरों को मुक्त करा लिया गया।मजदूरों की सुरक्षित वापसी से गांव में राहत का माहौल है। ग्रामीणों और समाजसेवियों ने इस पहल की सराहना की। सीमा चौधरी ने बताया कि इससे पहले भी वे नासिक में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकाल चुकी हैं।यह घटना फिर साबित करती है कि सामूहिक प्रयास और जागरूकता से बंधुआ मजदूरी जैसी कुप्रथा का मुकाबला किया जा सकता है।

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