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सहायक ब्यूरो चीफ रफीउल्लाह खान की रामपुर से स्पेशल रिपोर्ट


*आज दिनांक* 4* दिसंबर 2025 को मजलिसुल उलेमा उत्तर प्रदेश पश्चिम का दावत सेंटर, रामपुर में उलेमा कन्वेंशन *आयोजित किया गया, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से उलेमा-ए-इकराम ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना ज़मीरुल हसन खान फलाही (सरपरस्त-ए-आला, *मजलिसुल उलेमा) ने की*।
*कन्वेंशन का आरंभ मौलाना अब्दुल खालिक नदवी (*शैखुल हदीस, जामिआतुस सालिहात) की तिलावत और तज़कीर से हुआ। इसके बाद मौलाना मोहम्मद ओसाफ़ खां फलाही, *नाज़िम-ए-आला मजलिसुल उलेमा यूपी पश्चिम ने स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और मजलिस का परिचय प्रस्तुत किया*।
मौलाना सय्यद मुहीउद्दीन शाकिर ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मुल्क और मिल्लत की हालत चिंताजनक है, लेकिन निराशा और भावनात्मक प्रतिक्रिया का रास्ता छोड़कर उलेमा को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए मुस्लिम समुदाय का हौसला बढ़ाना चाहिए ताकि हम मुल्क और मिल्लत की उपयोगी पूंजी बन सकें।
इसके बाद “मुस्लिम समाज – वर्तमान से आवश्यक दिशा की ओर” विषय पर मौलाना सिराजुद्दीन नदवी, चेयरमैन मिल्लत एकेडमी बिजनौर ने समाज की स्थिति का विश्लेषण करते हुए उलेमा को आवश्यक कार्यों की ओर मार्गदर्शन दिया।
मौलाना मोहम्मद ताहिर मदनी, नाज़िम-ए-आला मजलिसुल उलेमा यूपी पूर्व ने कहा कि मुसलमानों को शिक्षा, अर्थव्यवस्था, समाज एवं राजनीति के मोर्चों पर जागरूक करने की आवश्यकता है।
डॉ. रिजवान अहमद रफ़ीकी फलाही, (रुकन, अल-इत्तहाद अल-आलमी ली उलमा अल-मुस्लिमीन) ने “दिनी व मिल्ली तहरीकों में राब्ता और ताल्लुकात” विषय पर बोलते हुए भारतीय संस्थाओं और संगठनों के इतिहास की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि हमें अपने संस्थागत कार्यों में ऐसा संबंध और सहयोग बनाना चाहिए जिससे हम एक दूसरे के सहायक बनें और उम्मत-ए-खैर की मिसाल पेश करें।
“भारत में शरीअत-ए-इस्लामिया के सामने चुनौतियाँ और जिम्मेदारियाँ” विषय पर मौलाना मोहम्मद मियां कासमी, (नाज़िम, सिराजुल उलूम, संभल) ने कहा कि उलेमा को चाहिए कि वे समुदाय को ईमान, चरित्र की मजबूती और आपसी एकता की ओर निरंतर प्रेरित करें।
कन्वेंशन के प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत लाभकारी बताया और आग्रह किया कि इस प्रकार के कार्यक्रम लगातार आयोजित होते रहने चाहिए। इसके बाद प्रतिभागियों द्वारा कुछ प्रस्ताव पारित किए गए।
अंत में अपने अध्यक्षीय संबोधन में सरपरस्त-ए-आला ने उलेमा को उनके मक़ाम और जिम्मेदारी की याद दिलाते हुए कहा कि मुसलमानों को ईमान पर कायम रखना, युवाओं की क्षमताओं को सकारात्मक दिशा देने की आवश्यकता है। उन्होंने मस्लकी मतभेदों से ऊपर उठकर मुल्क और मिल्लत की बेहतरी के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का समापन मौलाना अब्दुस्सलाम बस्तवी के धन्यवाद ज्ञापन और मौलाना ज़मीरुल हसन खान फलाही की दुआ पर हुआ। कन्वेंशन की सफलता में मौलाना हस्सान नदवी, फ़ैसल ज़फ़र, मौलाना मोहसिन जावेद, डॉ. नफ़ीस अहमद, जनाब मोहम्मद आसिम और मोहम्मद वसीम फलाही सहित अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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