छिबरामऊ। बढ़ती ठंड, घने कोहरे और वातावरण में नमी के कारण आलू की फसल पर बीमारियों और कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। खेतों में रोगग्रस्त पत्तियां और झुलसे पौधों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे किसानों में चिंता बढ़ गई है।

मौसम का यह बदलता मिजाज किसानों के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरा है। आलू की फसल पर कीटों का खतरा मंडरा रहा है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

इन हालातों को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष सलाह जारी की है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी संतलाल गुप्ता ने बताया कि बीमारी की शुरुआती पहचान और उसके प्रभावी बचाव के उपाय बताए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों की थोड़ी सी भी लापरवाही फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

संतलाल गुप्ता के अनुसार, इस समय ‘लेट ब्लाइट’ का प्रकोप सबसे अधिक देखा जा रहा है। नमी और कम तापमान के कारण पत्तियों पर पहले पानी जैसे धब्बे बनते हैं, जो बाद में काले पड़ जाते हैं। यह रोग बहुत तेजी से फैलकर खेत के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है।

लेट ब्लाइट से बचाव के लिए मैन्कोजेब और मेटालेक्सिल आधारित दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। 8-10 दिन बाद कॉपर आधारित दवा का पुनः उपयोग करें। इसके अतिरिक्त, खेत में पानी रुकने न दें और हवा का उचित प्रवाह बनाए रखें।

कृषि अधिकारी ने यह भी बताया कि तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण कई क्षेत्रों में ‘अर्ली ब्लाइट’ की

समस्या भी दिखाई दे रही है। इसके बचाव के लिए क्लोरोथालोनिल का छिड़काव करें और पोटाश का उपयोग सुनिश्चित करें।
रिपोर्ट शिवम् यादव

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