सभी कवियों ने प्रस्तुत की अपनी-अपनी सर्वश्रेष्ठ कविताएं

दैनिक उजाला पत्रिका,बाराबंकी (ब्यूरो चीफ आर अलवी) बज़्म-ए-अज़ीज़ का मासिक तरही मुशायरा शहर के नबीगंज में बज़्म अध्यक्ष अलहाज नसीर अंसारी के आवास पर आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता जनाब अकी़ल ग़ाज़ी पुरी ने की। संचालन का दायित्व हुज़ैल लालपुरी ने बखूबी निभाया। मोहसिन किदवई और लतीफ़ बाराबंकवी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सत्र में उपस्थित सभी कवियों ने बज़्म द्वारा दिया गया मिसरा तरह”तेरी निगाहे करम का है इंतज़ार मुझे” पर एक से बढ़कर एक कविताएं प्रस्तुत कीं।
प्रिय कविताएं पाठकों की सेवा भेंट हैं।
बहुत अज़ीज़ रहा है तेरा दयार मुझे।
यही बनाएगा इक रोज़ बा वक़ार मुझे।।
अकील ग़ाज़ीपुरी
तवाफ़े दर करूं या रब हवा में उड़-उड़ कर।
बना दे कूच-ए महबूब का ग़ुबार मुझे।।
हाजी नसीर अंसारी
सुपुर्द-ए-खा़क किया और हो गए रुख़सत।
मोहब्बतें का सिला दे के जां निसार मुझे।।
मोहसिन किदवई
वो एक लम्हा जो गुज़रा तेरी जुदाई में। तमाम बार किया उसने अश्क बार मुझे।।
लतीफ़ बाराबंकवी
उठी ही बात चमन में जो हिस्सेदारी की। हमेशा गुल के बजाए मिले हैं ख़ार मुझे।।
अज़ीम मशायखी़
बरोज़ हश्र इलाही मेरा भरम रखना।
समझ रही है ये दुनिया परहेज़गार मुझे।।
हुज़ैल लालपुरी
निगाहें मस्त से कुछ इस तरह से देख इधर।
जो होश खो दे मेरे आए वो ख़ुमार मुझे।।
डॉक्टर रेहान अलवी
फ़िदा है मुझ पे दिलो जां से अब मेरे दुश्मन
गुलों से बढ़ के मज़ा दे रहे हैं ख़ार मुझे।।
तुफ़ैल ज़ैदपुरी
क़दम-कदम पे नयी मुश्किलें मक़ाबिल हैं।
के वक्त अब नहीं लगता है साज़गार मुझे।।
मास्टर शोएब कामिल
ख़ुदा के वास्ते खाया ना कीजिए क़स्में तुम्हारी बातों पर यूं भी है ऐतबार मुझे।।
सरवर किन्तूरी
बिठा के पलकों पर ऐसे ना तू उतार मुझे। तुझे क़सम है ना कर इतना शर्मसार मुझे।।
आरिफ़ शहाबपुरी
लगे बहार का मौसम तेरे बगैर ख़िज़ां।
जो तू हो साथ ख़िज़ां भी लगे बहार मुझे।।
बशर मसौलवी
मेरी कमाई में इतनी ख़ुदा करे बरकत। किसी से कुछ भी न लेना पड़े उधार मुझे।
नज़र मसौलवी
मिला है जब से किसी अजनबी का प्यार मुझे।
ख़िजां भी लगने लगी अब नयी बहार मुझे।।
सबा शर्मा जहांगीराबादी
इनके अलावा कैफ़ बड़ेलवी और तालिब आलापुरी ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं।
नशिस्त के अख़िर में बज़्म के अध्यक्ष,
हाजी नसीर अंसारी ने सभी कवियों और श्रोताओं का धन्यवाद किया। और मिसरा तरह “काश पूछें वो कभी तेरी तमन्ना क्या है” (तमन्ना क़ाफ़िया और रदीफ़ क्या है )का ऐलान करते हुए बताया कि अगली नशिस्त जनवरी के दूसरे रविवार को इसी स्थान पर आयोजित की जाएगी।
मंडल ब्यूरो चीफ अयोध्या
तेज बहादुर शर्मा।
