
भारतीय सद्भावना मंच का हुआ आयोजन ।
रिपोर्टर अवनी महेश्वरी सहसवान
बदायूं ,सहसवान भारतीय सद्भावना मंच सूफ़ी संत मलंग प्रकोष्ठ राष्ट्रीय संयोजक पीर फैज़ अली आरएसएस भारतीय सद्भावना मंच सूफ़ी संत के राष्ट्रीय संयोजक ने दरगाह पर वन्दे मातरम पर लोगो के बीच बोले पीर फैज़ अली ने पर दरगाह पर फातिया दी दुआ करी देश मे भाई चारा और शैतानियत दूर हो इंसानियत कायम हो और वन्दे मातरम पर कहा बोले ये सिर्फ़ दो लफ़्ज़ नहीं हैं,ये उस मिट्टी की पुकार हैजिसने हमें पहचान दी, ज़ुबान दी, और“मोहब्बत ही इबादत है”और जब हम अपनी धरती से मोहब्बत करते हैं,तो वो भी इबादत बन जाती है।ये वतन किसी एक मज़हब का नहीं,किसी एक ज़ात का नहीं,ये वतन हर उस दिल का हैजो इसमें धड़कता है।कहीं मंदिर की घंटी है,कहीं मस्जिद की अज़ान,कहीं गिरजे की दुआ,तो कहीं गुरुद्वारे का अरदास—और इन सबके बीचवन्दे मातरम की एक ही आवाज़।सूफ़ी दरवेशों ने सिखाया—नफ़रत से दूर रहो,इंसान से मोहब्बत करो।और यही पैग़ाम वन्दे मातरम में छुपा है।

जब हम कहते हैं वन्दे मातरम,तो हम उस माँ को सलाम करते हैंजिसकी गोद मेंहिन्दू भी है, मुसलमान भी,सिख भी है, ईसाई भी।आज ज़रूरत हैदिलों को जोड़ने की,नफ़रत की दीवारें गिराने की।सूफ़ी सोच यही कहती है—सबका मालिक एक है,और वतन हम सबका एक है।आइए,मोहब्बत, भाईचारे और अमन के साथअपनी माँ को सलाम करें—वन्दे मातरम!वन्दे मातरम!वन्दे मातरम! इस मोके पर हमज़ा खान,यासिर,हैदर,यासीन,काशिफ,अकिल,बाबर चौधरी,राजा,समीर आदि लोग मौजूद रहे ।
