धर्मेन्द्र कसौधन(राष्ट्रीय ब्यूरो)
महाराजगंज/मिठौरा: सरकार ने मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल और ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था लागू की थी, लेकिन मिठौरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत देउरवा में इस तकनीक को ही भ्रष्टाचार का हथियार बना लिया गया है। यहाँ रोजगार सेवक द्वारा एक ही जैसे मजदूरों की तस्वीरें बार-बार अपलोड कर फर्जी हाजिरी भरने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से शासन को गुमराह कर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों के अनुसार, देउरवा पंचायत में बेचई गुप्ता के घर से बरवा सोनिया तक पीच रोड की दोनों पटरियों पर क्षेत्र पंचायत द्वारा मिट्टी का कार्य कराया जा रहा है। इस कार्य के नाम पर मनरेगा पोर्टल पर 10 मस्टर रोल में कुल 91 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की गई है। फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब पोर्टल पर अपलोड की गई तस्वीरों की जांच की गई।
तकनीक को दे रहे मात: मस्टरोल का सच:
आरोप है कि मास्टर रोल संख्या 7392 से लेकर 7401 तक में एक ही समूह के मजदूरों की तस्वीरें बार-बार दोहराई गई हैं। पोर्टल पर अलग-अलग मस्टर रोल में समान फोटो का होना इस बात की पुष्टि करता है कि फील्ड पर काम हो न हो, लेकिन कागजों और डिजिटल रिकॉर्ड में फर्जी तरीके से हाजिरी पकाकर भुगतान की तैयारी पूरी कर ली गई है।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल:
इस गंभीर अनियमितता के संबंध में जब मिठौरा के एपीओ (मनरेगा) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। ग्रामीणों का कहना है कि ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की यह चुप्पी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। पूर्व में भी कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से रोजगार सेवकों के हौसले बुलंद हैं।
ग्रामीणों ने की जांच की मांग:
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) से मांग की है कि:
1)मस्टर रोल संख्या 7392 से 7401 तक की भौतिक और तकनीकी जांच हो।
2)दोषियों के खिलाफ गबन और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया जाए।
3)योजना का लाभ असली जरूरतमंद मजदूरों तक पहुँचाना सुनिश्चित किया जाए।
ग्रामीणों में यह भी कहा कि, “अगर डिजिटल हाजिरी में भी इसी तरह फोटो का हेरफेर कर पैसा निकाला जाएगा, तो मनरेगा जैसी योजना सिर्फ भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह जाएगी। हम इसकी शिकायत ऊपर तक करेंगे।”
