
दो दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान का आयोजन
वाराणसी इंटरनेशनल वेदांत सोसाइटी अपने प्रतिस्थापक एवं उपास्य श्री भगवान जी के 85 वें जन्मोत्सव के अवसर पर 2 और 3 जनवरी 2026 श्रृंगारी मठ महमूरगंज में दो दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया है, इस महोत्सव में देश और विदेश से लगभग 500 भक्त सम्मिलित हुए हैं। आज 2 जनवरी हमारे मुख्य अतिथि श्रीकांत मिश्रा जो की काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी है वह भी हमारे बीच उपस्थित है। 2 जनवरी की शाम तथा 3 जनवरी को सुबह 10:00 बजे और शाम 5:00 बजे से आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। जिसमें आध्यात्मिक प्रवचन, भजन, नृत्य तथा संगीत के कार्यक्रम सम्मिलित है। श्री भगवान जी का महान जीवन, लगभग 30 40 वर्ष तक त्याग एवं तपस्या में उनके महान कार्य मानव सेवा विश्वबंधुत्व तथा सतत साधना एवं आध्यात्मिक अध्ययन, श्रमण परंपरा और अस्तित्व के सत्य से एकात्मता की उनकी अनुभूति के परिणाम स्वरूप मानवता के प्रति अपने अटूट प्रेम से प्रेरित होकर श्री भगवान जी ने 19 नवंबर 1989 को इंटरनेशनल वेदांत सोसाइटी की स्थापना की। 3 तारीख को सुबह ब्राह्मण भोज होगा तथा दोपहर 1:00 से साधु भंडारा होगा जिसमें वाराणसी के प्रसिद्ध 100 साधुओं का सेवा कार्य संपन्न किए जाएंगे। हमारे लंदन तथा नीदरलैंड के आश्रम में से श्रद्धालु सन्यास भी ग्रहण करेंगे, तथा सत्यपंथा इंग्लिश मैगजीन, सोनो विश्ववाशी बांग्ला मैगजीन, कम्यूनियन विद थे डिवाइन (ललिता देवी) इंग्लिश बुक, मुंडऊपासक (स्वामी स्वरूपानंद पुरी) द्वारा रिलीज किया जाएगा। शायन कालीन सभा में उत्तर प्रदेश तथा भारतवर्ष के अनेक विद्वान एवं विशिष्ट जन्म अंश ग्रहण करेंगे श्री भगवान के इस जन्म तिथि पर अनेक सेवा मूल्य कार्य भी इंटरनेशनल वेदांत समिति द्वारा किए जाएंगे जिसमें विशेष,7 व्हील चेयर दिव्यांगों को तथा माता आनंदमई अस्पताल को दिए जाएंगे।,विमल चंद्र घोष दिव्यांग विद्यालय में दिव्यांग बच्चों के रोजगार हेतु एक टी शर्ट प्रिंटिंग मशीन दिया जाएगा।
विद्यालय जाने के लिए 30 छात्र एवं छात्राओं को साइकिल दिया जाएगा।
नवजीवन ट्रस्ट, रमन के गांव में गरीब बच्चों को लेकर एक विद्यालय चलती है, उस विद्यालय के बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा प्रदान करने के लिए इंटरनेशनल वेदांत सोसाइटी एक कंप्यूटर प्रदान करेगी। संस्था द्वारा वाराणसी के गलियों में रहने वाले गरीब बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान किया जाएगा। 3 तारीख शैक्षणिक कार्यक्रम में वाराणसी के प्रसिद्ध शिल्पियों के द्वारा गायन, वाद्य तथा नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। जिसमें देवाशीश दे, सुखदेव प्रसाद मिश्र, डॉ जय राय तथा अन्य विद्वान भी शामिल है।
