
अईसीएआर प्रायोजित सीएएफ्टी प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन विशेषज्ञ व्याख्यान एवं उन्नत जैव प्रौद्योगिकी सुविधाओं का भ्रमण किया गया।
वाराणसी आईसीएआर प्रायोजित कार्यात्मक दुग्ध खाद्यः संकल्पना से व्यवसायीकरण तक” विषयक उन्नत संकाय प्रशिक्षण (CAFT) कार्यक्रम के दूसरे दिन, दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कार्यात्मक खाद्य एवं दुग्ध अनुसंधान से संबंधित विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ उन्नत जैव-प्रौद्योगिकी एवं विश्लेषणात्मक सुविधाओं का अवलोकन कराया गया। इस अवसर पर डॉ. गोपाल नाथ, एमडी पीएचडी, एफएएमएस, डीन (अनुसंधान), चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू, द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य अनुसंधान में बैक्टीरियोफेज के अनुप्रयोग विषय पर आमंत्रित व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने रोगजनक सूक्ष्मजीवों के नियंत्रण में बैक्टीरियोफेज की भूमिका को एक लक्षित जैविक माध्यम के रूप में स्पष्ट किया तथा दुग्ध एवं खाद्य प्रणालियों में पारंपरिक प्रतिजैविक विधियों के प्रभावी विकल्प के रूप में इसकी संभावनाओं पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात प्रो. अनिल कुमार चौहान, वरिष्ठ प्राध्यापक एवं पाठ्यक्रम निदेशक, दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग, द्वारा खाद्य सुरक्षा, खाद्य कानून एवं नियामक अनुपालन विषय पर विशेष व्याख्यान दिया गया। उन्होंने कार्यात्मक दुग्ध उत्पादों के सफल व्यवसायीकरण में राष्ट्रीय खाद्य नियमों, सुरक्षा मानकों तथा नियामक ढाँचों के महत्व पर विस्तृत चर्चा की।
द्वितीय दिवस की गतिविधियों के अंतर्गत प्रतिभागियों को BIO-NEST जैव प्रौद्योगिकी एवं उन्नत विश्लेषणात्मक सुविधाओं का भ्रमण भी कराया गया, जहाँ उन्हें सेंट्रीफ्यूज (500 मि.ली. 4 क्षमता), CO₂ इनक्यूबेटर, डीप फ्रीज़र, शेकर इनक्यूबेटर, थर्मल साइक्लर, यूवी – विज़िबल स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, नैनोड्रॉप प्रणाली, जेल डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम एवं ट्राइनोक्युलर माइक्रोस्कोप जैसे अत्याधुनिक उपकरणों से अवगत कराया गया। इसके अतिरिक्त, SATHI योजना के अंतर्गत उपलब्ध उन्नत उपकरणों जैसे पलो साइटोमीटर (बेकमैन कूल्टर), लाइव सेल इमेजिंग सिस्टम (CD7), न्यूरोल्यूसीडा, रमन AFM-SNOM प्रणाली, एक्स-रे फोटोइलेक्ट्रॉन स्पेक्ट्रोस्कोपी (XPS), एक्स-रे फ्लोरेसेंस (XRF) तथा एक्स-रे विवर्तन (XRD) की कार्यप्रणाली का भी अवलोकन कराया गया। इस प्रयोगशाला भ्रमण से प्रतिभागियों को जैव-सक्रिय यौगिकों के प्रोफाइलिंग, सूक्ष्म तत्व विश्लेषण, सूक्ष्मजीवी एवं कोशिकीय अध्ययन, संरचनात्मक विशेषण तथा उत्पाद स्थिरीकरण से संबंधित उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ। विशेषज्ञ व्याख्यानों एवं प्रत्यक्ष प्रयोगशाला अवलोकन के संयुक्त आयोजन से प्रतिभागियों की खाद्य सुरक्षा, नियामक ढाँचे, उद्यमिता समर्थन प्रणालियों तथा उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों की समझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे सीएएफटी प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुप्रयोग-उन्मुख उद्देश्योंको और अधिक सुदृढ किया गया। सीएएफटी प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन प्रो. राज कुमार दुआरी एवं वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. अनिल कुमार चौहान के नेतृत्व में किया गया, जिसमें डॉ. तरुण वर्मा (पाठ्यक्रम समन्वयक) तथा डॉ. अरविंद कुमार, सह-प्राध्यापक, काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा सहयोग प्रदान कियागया।
