
बनारस कचहरी में ऐतिहासिक चुनाव
20 दिनों में लड़ा गया रिकॉर्ड चुनाव, शशांक शेखर त्रिपाठी ने तीसरी बार रचा इतिहास।
वाराणसी दी बनारस बार एसोसिएशन वाराणसी के वर्ष 2026 के चुनाव में वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने लगभग 400 मतों के भारी अंतर से विजय प्राप्त कर न केवल चुनाव जीता, बल्कि बनारस कचहरी के इतिहास में एक नया और अविस्मरणीय अध्याय भी जोड़ दिया।इस चुनाव की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि यह पूरा चुनाव अत्यंत कम समय—लगभग 20 दिनों में संपन्न हुआ। इतनी अल्प अवधि में चुनाव लड़ना, अधिवक्ताओं तक पहुँचना, संवाद स्थापित करना और निर्णायक समर्थन प्राप्त करना अपने आप में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है।कम समय, बड़ा जनादेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार, सामान्यतः ऐसे पदों के लिए महीनों तक चलने वाले प्रचार के बावजूद स्पष्ट जनादेश बन पाना कठिन होता है, किंतु शशांक शेखर त्रिपाठी ने मात्र 20 दिनों में जिस प्रकार अधिवक्ता समाज का विश्वास अर्जित किया, वह उनकी लोकप्रियता, कार्यशैली और वर्षों की निरंतर सक्रियता का प्रमाण है। तुलनात्मक आंकड़े क्या कहते हैं वर्ष 2025 के चुनावों की तुलना में 2026 में मतों का रुझान पूरी तरह परिवर्तित दिखाई दिया। जहां पूर्व चुनावों में वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर मतों का बिखराव था, वहीं 2026 में अधिवक्ताओं का समर्थन स्पष्ट रूप से एक मजबूत नेतृत्व के पक्ष में एकजुट हुआ। शशांक शेखर त्रिपाठी के चुनाव मैदान में उतरते ही अन्य प्रत्याशियों के पारंपरिक वोट बैंक पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा और मतों का ध्रुवीकरण स्पष्ट रूप से उनके पक्ष में हुआ। यह जीत संख्याओं से कहीं आगे जाकर नेतृत्व पर विश्वास को दर्शाती है। सशक्त टीम और संगठित कार्यशैली इस विजय के पीछे केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि कचहरी में उनकी सशक्त, अनुशासित और समर्पित टीम की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। अल्प समय में संगठित रणनीति, निरंतर संपर्क और मुद्दा-आधारित संवाद ने चुनाव को निर्णायक दिशा दी। 130 वर्षों में पहली बार
विशेष रूप से उल्लेखनीय तथ्य यह है कि बनारस कचहरी के लगभग 130 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब कोई अधिवक्ता तीन बार उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुआ हो, और वह भी तीसरी बार रिकॉर्ड मतों के साथ। लोकप्रिय नेतृत्व का स्पष्ट संकेत लगभग 400 मतों की निर्णायक बढ़त यह दर्शाती है कि शशांक शेखर त्रिपाठी अब केवल एक निर्वाचित पदाधिकारी नहीं, बल्कि कचहरी के सर्वमान्य, जनप्रिय और प्रभावशाली नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित हो चुके हैं। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि यह परिणाम आने वाले वर्षों में कचहरी की कार्यसंस्कृति, अधिवक्ता हितों और संगठनात्मक मजबूती की दिशा तय करेगा।
