
काशी की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक सस्था आवर्तन सगीत संस्थान का 29वा स्थापना दिवस।
वाराणसी मकर सक्राति के पावन अवसर पर काशी की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक सस्था आवर्तन सगीत संस्थान का 29वा स्थापना दिवस 15 जनवरी गुरुवार को आवर्तन वार्षिक उत्सव के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ कन्हैया लाल स्मृति भवन में मनाया गया। कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत, गुरु-शिष्य परंपरा और सास्कृतिक मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ मीनाक्षी ने आवर्तन संगीत संस्थान की स्थापना, उद्देश्यों और 29 वर्षों की सांगीतिक यात्रा पर प्रकार डाला।
इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत सुप्रसिद्ध नाट्यकर्मी सुश्री सुमन पाठक ने माल्यार्पण, उत्तरीय एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर किया
दीप प्रज्ज्वलन सभी सम्मानित अतिथियों द्वारा किया गया, जिससे कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
इसके बाद स्वागत भाषण डॉ. रति शंकर त्रिपाठी द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने काशी की संगीत परंपरा में आवर्तन संगीत सस्थान की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। इसके उपरांत गणेश बंदना एवं राग दुर्गा की प्रस्तुति संस्था की सबसे नन्हीं छात्राओं मीरा एवं आर्या द्वारा दी गई, जिसने ऑताओं का मन मोह लिया।
विशिष्ट अतिथि एवं सीईओ, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विश्व भूषण मिश्रा ने अपने आशीर्वचन में कहा कि काशी की सांस्कृतिक पहचान की जीवंत बनाए रखने में संगीत संस्थानों की अहम भूमिका है। इसके पश्चात प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने राग अल्हैया बिलावल में बंदिश प्रस्तुत करते हुए भजन “गोविंद गोपाला” का भावपूर्ण गायन किया।
इसके बाद द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा राग वृंदावनी सारंग की प्रस्तुति के साथ दादरा “मोरी गोरी गोरी बहियां प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों ने राग पटदीप में बंदिश के साथ दादरा “डगर बीच” का सशक्त एवं लयबद्ध गायन किया। कार्यक्रम के क्रम में बीएचयू संगीत विभाग की डा संगीता पंडित ने आशीर्वचन देते हुए गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत चतुर्थ एवं पंचम वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा राग मारवा की प्रस्तुति दी गई, साथ ही दादरा “जमुना किनारे” प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।वरिष्ठ विद्वान अमिताभ भट्टाचार्य ने अपने आशीर्वाद एवं प्रतिक्रिया में आवर्तन संगीत संस्थान को काशी की सांस्कृतिक चेतना का सशक्त केंद्र बताया। इसके बाद षष्ठ वर्ष के विद्यार्थियों ने राग पूरिया धनाश्री में बंदिश प्रस्तुत करते हुए दादरा “प्यारा रे मोरी गुडिवा” का मनोहारी गायन किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में राग भैरवी की बंदिश के साथ ठुमरी एवं दादरा की प्रस्तुति दी गई, जिसने सपूर्ण वातावरण को रसपूर्ण बना दिया। मकर सक्राति के अवसर पर राग हमीर में संक्राति गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसके उपरात मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध प्रसारक एवं लेखिका डॉ. अनामिका श्रीवास्तव ने अपने आशीर्वचन एवं प्रतिक्रिया में कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी सांस्कृतिक आत्मा का आधार है और आवर्तन संगीत संस्थान नई पौड़ी को इस परंपरा से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रहा है। संस्था की सचिव विदुषी सुचरिता गुप्ता ने सभी अतिधियों, गुरुजनों, कलाकारों एवं श्रोताओं के प्रति आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।
