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सहायक ब्यूरो चीफ
रफीउल्लाह खान
इस मौके पर मौजूद प्रदेश महासचिव जुबैद ख़ान ने कहा कि 2020–21 के किसान आंदोलन के बाद सरकार ने किसानों से कई वादे किए थे, लेकिन आज तक उन्हें पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) किसानों की लागत के अनुसार नहीं दिया जा रहा है, जिससे किसान घाटे में खेती करने को मजबूर हैं।
ज्ञापन में बताया गया कि किसानों की फसलें घोषित एमएसपी से कम दामों पर बिक रही हैं, जबकि खाद, बीज और खेती से जुड़ी चीज़ें लगातार महंगी हो रही हैं। ज़िला मीडिया प्रभारी फ़ैसल ख़ान ने कहा कि सरकारी खरीद सही तरीके से न होने से किसानों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।
किसान संगठनों ने बिजली विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025, वीबी–ग्राम जी अधिनियम 2025 और चार श्रम संहिताओं का विरोध किया। जुबैद ख़ान ने कहा कि नए बिजली कानून से किसानों पर बिजली का बोझ बढ़ेगा और बीज विधेयक से बड़ी कंपनियों का नियंत्रण बढ़ जाएगा।
ज्ञापन में मनरेगा को कमजोर करने, मज़दूरों के अधिकार घटाने और जनता की आवाज़ दबाने पर भी चिंता जताई गई। फ़ैसल ख़ान ने कहा कि इससे ग्रामीण रोज़गार और मज़दूरों की सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा।
किसान संगठनों ने सरकार से सभी फसलों पर सही एमएसपी की गारंटी, किसानों और मज़दूरों का कर्ज़ माफ करने और किसान हित में कानून बनाने की मांग की। अंत में जुबैद ख़ान ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।

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