
जानलेवा हमले के मामले में अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज।
अभियोजन व पीड़ित पक्ष की सशक्त बहस से न्यायालय संतुष्ट, युवा अधिवक्ताओं में हर्ष।
वाराणसी जनपद के एक गंभीर आपराधिक मामले में माननीय सत्र न्यायाधीश, वाराणसी द्वारा अभियुक्त सुनील यादव उर्फ सोपाडू यादव की जमानत याचिका को तथ्यों, चिकित्सकीय साक्ष्यों एवं विधिक नज़ीरों के आधार पर निरस्त कर दिया गया। मामला थाना चितईपुर, जनपद वाराणसी से संबंधित है, जिसमें अभियुक्त पर दिनांक 24 अगस्त 2025 को सरेआम गाली-गलौज के बाद चाकू से जानलेवा हमला करने का आरोप है। इस हमले में पीड़ित अमित केशरी को गंभीर चोटें आईं, जिनका उपचार बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में किया गया। सी.सी.टी.वी. फुटेज एवं चिकित्सकीय रिपोर्ट (CECT Thorax) में Left Hemothorax एवं Lung Contusion जैसी गंभीर चोटों की पुष्टि हुई। अभियोजन की ओर से कड़ा विरोध अभियोजन पक्ष की ओर से डी. जी.सी. क्रिमिनल / मुनीब सिंह चौहान ने जमानत याचिका का सशक्त विरोध करते हुए न्यायालय को अवगत कराया कि अभियुक्त द्वारा धारदार हथियार से किया गया हमला अत्यंत गंभीर, सुनियोजित एवं प्राणघातक प्रकृति का है। अभियोजन ने यह भी रेखांकित किया कि अभियुक्त की संलिप्तता सी.सी.टी.वी. फुटेज, चिकित्सकीय साक्ष्य एवं केस डायरी से स्पष्ट रूप से सिद्ध होती है। पीड़ित पक्ष की प्रभावी बहस वादी मुकदमा/पीड़ित की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष शुक्ला ने संयुक्त रूप से प्रभावी बहस करते हुए न्यायालय का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट कराया कि अभियुक्त ने जान से मारने की नीयत से हमला किया, जिससे पीड़ित की जान भी जा सकती थी।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अभियुक्त को जमानत दिए जाने की स्थिति में पुनः अपराध कारित करने एवं गवाहों को प्रभावित करने की गंभीर आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की नज़ीरों का उल्लेख बहस के दौरान माननीय सर्वोच्च न्यायालय के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला दिया गया, जिनमें दिलीप सिंह बनाम राज्य, किशोर बनाम राज्य तथा स्टेट आफ यू पी बनाम अमरमणि त्रिपाठी जैसे निर्णय शामिल रहे, जिनमें यह सिद्धांत स्थापित किया गया है कि गंभीर एवं संगीन अपराधों में जमानत कोई सामान्य अधिकार नहीं है।न्यायालय का आदेश और अधिवक्ता समाज की प्रतिक्रिया न्यायालय ने समस्त तथ्यों, परिस्थितियों, साक्ष्यों तथा अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त की जमानत याचिका को दिनांक 19 जनवरी 2026 को निरस्त कर दिया। उल्लेखनीय है कि यह मामला युवा अधिवक्ता पवन केशरी के सगे साले से संबंधित था। जैसे ही जमानत याचिका खारिज होने का आदेश पारित हुआ, अधिवक्ता समुदाय विशेषकर युवा अधिवक्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। युवा अधिवक्ताओं ने इस निर्णय को न्याय की जीत बताते हुए कहा कि इससे न्यायालयों में आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
