रामनगर, बाराबंकी।
जनपद बाराबंकी की तहसील रामनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत गणेशपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिवस पर बुधवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और सायंकाल कथा प्रारंभ होते ही पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया।
कथा के दौरान कथा व्यास पंडित अश्वनी कुमार त्रिपाठी जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मणी के पावन विवाह की मंगल कथा का विधि-विधान के साथ अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने रुक्मणी हरण, भगवान श्रीकृष्ण की लीला, प्रेम, भक्ति और मर्यादा का ऐसा सजीव चित्रण किया कि श्रोता कथा से स्वयं को जोड़ने लगे। कथा के प्रत्येक प्रसंग पर श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं और जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
कथावाचक ने अपने प्रवचन में बताया कि रुक्मणी विवाह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। सच्चे भाव और विश्वास से किया गया स्मरण ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग है। कथा के बीच-बीच में भजन-कीर्तन ने श्रद्धालुओं को भक्ति में और अधिक डुबो दिया।
इसी अवसर पर आचार्य अभिषेक मिश्र एवं आचार्य सूर्य प्रकाश मिश्र के सान्निध्य में यजमान सुरेश कुमार शुक्ल एवं लक्ष्मी शुक्ल द्वारा विधि-विधान से पूजन-अर्चन संपन्न कराया गया। पूजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
कथा स्थल पर समाजसेवी राम कुमार शुक्ला उर्फ पिंटू ,के के शुक्ल आनंद कुमार शुक्ला अनुपम शुक्ला आशीष शुक्ला अवधेश कुमार शुक्ला, देवी दयाल नाथ, चिंतामणि त्रिपाठी, रामसहाय वर्मा, गणेश त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार अशोक सिंह, इंद्र लाल मिश्रा, समाजसेवी शिव शंकर शुक्ला, गिरिजा प्रसाद तिवारी, सोहनलाल, देवी सरलेश सिंह शिवराम प्रदीप आदित्य दुर्गेश पंडित शिवपाल मिश्रा रामगोपाल मिश्रा शिव मंगल शुक्ला दीपक पवन त्रिवेदी पुजारी, ग्राम गणेशपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने समान रूप से कथा का श्रवण किया। आयोजकों ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का यह आयोजन आगामी दिनों तक जारी रहेगा और प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।
कुल मिलाकर छठे दिवस की कथा ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, प्रेम और संस्कारों का गहरा संदेश छोड़ दिया।

मंडल ब्यूरो चीफ अयोध्या तेज बहादुर शर्मा।

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