रिपोर्ट नसरुद्दीन अंसारी जौ नपुर।
देशभर के लाखों पत्रकारों की बदहाल आर्थिक स्थिति को लेकर क्रांतिकारी पत्रकार परिषद (पंजी.) के संस्थापक/केंद्रीय प्रमुख क्रांतिकारी संपादक अनिल दूबे आजाद ने केंद्र सरकार से गंभीर हस्तक्षेप की मांग की है। क्रांतिकारी पत्रकार परिषद द्वारा सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार से प्रेस बयान जारी कर पत्रकारों को न्यूनतम मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक संरक्षण देने की अपील की गई है। *बिन हवा न पत्ता हिलता है बिन लड़े न हिस्सा मिलता है* इसलिए सभी क्रांतिकारी पत्रकारों को कमर कसना होगाक्रांतिकारी पत्रकार परिषद द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि जिला, तहसील, ब्लॉक और ग्रामीण स्तर पर कार्यरत अधिकांश समाचार पत्रों के प्रतिनिधि अवैतनिक रूप से काम कर रहे हैं। दिन-रात जनता की समस्याएं उठाने वाले पत्रकार स्वयं अपने परिवार का पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं। उन्हें न तो किसी तरह का वेतन मिलता है और न ही सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ। क्रांतिकारी संपादक एवं केंद्रीय प्रमुख ने सवाल उठाया है कि जब सरकार मनरेगा मज़दूर को न्यूनतम मज़दूरी और काम के घंटे तय करती है, तो 24 घंटे सामाजिक ड्यूटी करने वाले पत्रकार को कम से कम मज़दूर का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता? मांग में प्रमुख रूप से न्यूनतम वेतन की गारंटी, ग्राम पंचायत स्तर तक सरकारी विज्ञापन एवं विज्ञापन कमीशन व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा के तहत पत्रकार सहित उनके परिवार को मुफ्त स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, शिक्षा में विशेष रियायत व अन्य के साथ ही पत्रकार कल्याण कोष के माध्यम से सक्रिय पत्रकारों की आवश्यकतानुसार मदद की मांग रखी गई है। इसके आगे मार्मिक अंदाज में मांग करते हुए यह भी कहा गया है कि जब पत्रकार की जेब खाली होती है और घर में बच्चों की भूख सामने होती है, तब निष्पक्ष पत्रकारिता करना अत्यंत कठिन हो जाता है। यदि लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है, तो पत्रकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना अनिवार्य है।क्रांतिकारी पत्रकार परिषद(KPP)ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस अदृश्य श्रमशक्ति की पीड़ा को समझेगी और पत्रकारों को सम्मानजनक “मज़दूर” का दर्जा देते हुए ठोस नीति लागू करेगी।

