
एमडी न्यूज़ बहुआयामी समाचार न्यूज़ चैनल
जिला रिपोर्टर यूसुफ की रिपोर्ट





बिलासपुर (रामपुर)।
भारत सरकार और अमेरिका सरकार के बीच कृषि को लेकर हुए समझौते के विरोध में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन भानू के कार्यकर्ता और पदाधिकारी बिलासपुर तहसील परिसर में एकजुट होकर सड़क पर उतर आए। तहसील परिसर स्थित पार्क में किसानों की समस्याओं पर मंथन के बाद किसानों ने जमकर नारेबाजी की और भारत सरकार के नाम चार सूत्रीय ज्ञापन तैयार किया।
किसानों का आरोप है कि यह समझौता सीधे तौर पर भारत के किसानों के खिलाफ है और इससे देश की कृषि व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। नारेबाजी करते हुए किसान उप जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचे, जहां उनकी आवाज सुनकर तहसीलदार स्वयं किसानों के बीच पहुंचे और उनकी बात सुनी। इसके बाद किसानों ने ज्ञापन सौंपा।
किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन भानू के जिला अध्यक्ष मोहम्मद सलीम वारसी ने कहा कि भारत सरकार ने अमेरिका से जो कृषि समझौता किया है, वह पूरी तरह किसान विरोधी है। इस समझौते से न केवल किसान कमजोर होगा बल्कि देश की आर्थिक और खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले से ही कर्ज में डूबा किसान इस समझौते को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। आरोप लगाया गया कि अमेरिका से आने वाले अनाज और सब्जियों को बिना किसी जांच के भारत में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है, जबकि भारत के अनाज और सब्जियों पर अमेरिका द्वारा भारी टैक्स लगाया गया है। यह बराबरी नहीं बल्कि किसानों के साथ खुला अन्याय है।
किसान नेता ने कहा कि इतिहास गवाह है कि किस तरह ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार के नाम पर भारत आई और धीरे-धीरे देश को गुलामी की ओर धकेल दिया। आज वही स्थिति अमेरिका के साथ दोहराई जा रही है। टैक्स फ्री आयात के जरिए भारत के किसानों की कमर तोड़ने की साजिश की जा रही है।
उन्होंने साफ कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और किसान इस देश का असली मालिक है। किसानों की सहमति के बिना कृषि से जुड़ा कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
किसानों ने प्रधानमंत्री द्वारा 2014 में किए गए वादों को याद दिलाते हुए कहा कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लागत पर डेढ़ गुना समर्थन मूल्य आज तक लागू नहीं किया गया। किसानों का आरोप है कि सरकार किसानों की आवाज बनने के बजाय अमेरिका की आवाज बन गई है। किसानों ने बताया कि इस समय किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान आवारा पशुओं से हो रहा है। खड़ी फसल में पशु घुसकर फसल बर्बाद कर रहे हैं। ठंड में रात-रात भर खेतों की रखवाली करने के बावजूद किसान सुरक्षित नहीं है। कई मामलों में पशुओं ने किसानों पर हमला किया है और जान तक चली गई है। आरोप लगाया गया कि जब किसान पशुओं को भगाता है तो कुछ फर्जी गौ रक्षक पुलिस पर दबाव बनाकर किसान के खिलाफ कार्रवाई कराने की कोशिश करते हैं। किसानों ने मांग की कि आवारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में भेजा जाए। इसके साथ ही नहर विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। किसानों का कहना है कि नहरों और माइनरों पर कब्जे कराए गए हैं, सफाई के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है और खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि भारत सरकार ने किसान विरोधी कृषि समझौता वापस नहीं लिया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसान किसी भी कीमत पर अपने हक और अस्तित्व से समझौता नहीं करेगा। इस मौके पर युवा जिला अध्यक्ष मोहम्मद आसिम, राजा रईस अहमद, सतनाम सिंह, बलजीत सिंह, जीत सिंह, रमन सिंह, अफसर अली, मुराद खान, रेखा रानी, उषा, उर्मिला, सफदर अली, मोहम्मद अहमद, मतलूब हसन, लियाकत खान, सिद्दीक अहमद, गुरदीप सिंह, मोहम्मद आरिफ, सादिक अहमद, जगतार सिंह, यामीन, मुस्तफा, यमुना प्रसाद, मोहम्मद आजम शरीफ, सोनू, राजवीर सिंह, जसबीर सिंह, रिजवान अली, मुबारक हसन, सतपाल सिंह, गुफरान अली, साबिर अली, फरीद अहमद, मुअज्जम, सतबीर सिंह, हरेंद्र सिंह, सलमान अहमद, मारूफ अली, खलील अहमद सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।w
