उत्तर प्रदेश सरकार ने मनरेगा और वीबी-जीरामजी (विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) में वेंडर पंजीकरण नियम सख्त कर दिए हैं। अब ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और पंचायत से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के सगे-संबंधी सरकारी योजनाओं में ठेकेदारी या सामग्री आपूर्ति नहीं कर सकेंगे।


ग्राम्य विकास विभाग की ओर से जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े किसी भी पदाधिकारी या कर्मचारी के परिवार का सदस्य वेंडर के रूप में पंजीकृत नहीं होगा। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मनरेगा समेत संबंधित योजनाओं में पहले से पंजीकृत फर्मों की नए सिरे से जांच कराएं। यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति के रिश्तेदार की फर्म पाई जाती है तो उसका पंजीकरण तत्काल रद्द किया जाएगा।
नए नियमों के दायरे में ब्लॉक प्रमुख, बीडीओ, ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, सहायक कार्यक्रम अधिकारी, लेखाकार, कंप्यूटर ऑपरेटर और ग्राम रोजगार सेवक सहित सोशल ऑडिट से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं। शासन ने ‘निकट संबंधी’ की परिभाषा भी स्पष्ट करते हुए पारदर्शिता और भाई-भतीजावाद पर रोक को प्राथमिकता बताया है।


ब्यूरो चीफ रामानंद सागर

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