उत्तर प्रदेश कानपुर के कपिल मिश्रा और अमरदीप। दोनों ने 12वीं तक पढ़ाई की। दोनों ने मिलकर 250 करोड़ की ठगी कर ली। हां, 250 करोड़ रुपए की। अब पकड़े गए हैं तो इनके किस्से सामने आ रहे।
दोनों लोन के नाम पर गरीब, बेरोजगार युवा और मजदूरों को थोड़े पैसा का लालच देकर उनका आधार कार्ड, पैन और बैंक डिटेल ले लेते थे। इन्हीं कागजों के आधार पर जीएसटी पोर्टल पर कागजी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कराते हैं।
ये फर्में बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की सप्लाई किए केवल कागजी बिल जारी करती हैं। माल की आवाजाही दिखाने के लिए फर्जी ई-वे बिल भी जनरेट किए जाते हैं।
फर्जी फर्म (A) दूसरी फर्म (B) को बिल जारी करती है। फर्म B इस बिल के आधार पर सरकार से उस टैक्स का क्रेडिट मांगती है जो वास्तव में कभी चुकाया ही नहीं गया। कई फर्में आपस में एक घेरे (Chain) में बिल घुमाती रहती हैं ताकि उनका टर्नओवर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा सके और भारी मात्रा में ITC क्लेम करके सरकार का करोड़ों का जीएसटी चोरी करके हड़प रहे थे।
जमा किए गए फर्जी ITC का उपयोग करके अपनी टैक्स देनदारी कम की जाती है या सरकार से जीएसटी रिफंड के रूप में मोटी रकम वसूल ली जाती है। अंत में इस पैसे को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए घुमाकर एक नंबर या व्हाइट मनी तैयार की जा रही थी।
आप अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड को अपने ही पास रखिए। बहुत सारे शातिर घूम रहे, कब आपके नाम से ठगी शुरू करेंगे, आपको पता भी नहीं चलेगा।
ब्यूरो चीफ रामानंद सागर

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