लोगों को इस समय हाई बाप मचाने की बजाय थोड़ा समझ से काम लेना चाहिए और अफवाहों से बचना चाहिए क्योंकि युद्ध, अकाल, प्राकृतिक आपदा, या अचानक से मूल्य वृद्धि जैसी कोई भी परिस्थिति बनने पर सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 लागू कर देती है ताकि बेहद जरूरी सामान जैसे अनाज, दवाएं, तेल, पेट्रोलियम, तेल, चीनी, सब्जियां, दलहन और बाकी जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकी जा सके और आमजन को इनकी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
मिडिल ईस्ट संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने गैस और बाकी जरूरी चीजों की जमाखोरी रोक ने लिए देशभर में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू कर दिया है। जिसके कारण अब गैस को 4 कैटेगरी में बांटा जाएगा।
पहली कैटेगरी जिसमे घर की रसोई गैस (PNG) और गाड़ियों में डलने वाली CNG आती है। इन्हें पहले की तरह पूरी गैस मिलती रहेगी। बस गैस बुकिंग सम्बंधित कुछ नियमों का पालन करना होगा। जैसे दो सिलेंडरों की बुकिंग में 21 दिनों का गैप रखा जाएगा।
दूसरी कैटेगरी में खाद और उर्वरक फैक्ट्रियों को करीब 70% गैस दी जाएगी। बस उन्हें यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल खाद बनाने में ही हुआ है।
तीसरी कैटेगरी में नेशनल ग्रिड से जुड़ी चाय की फैक्ट्रियों और दूसरे बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत की लगभग 80% गैस मिलेगी।
चौथी कैटेगरी शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से लगभग 80% गैस दी जाएगी।
दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20 से 25% हिस्सा हारमुज़ से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए भी इसी पर निर्भर हैं और भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान का लगभग निर्यात भी इसी रास्ते से जुड़ा हुआ है,
पिछले दिनों अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% LNG कतर से ही आयात करता है।
जो करीब करीब 2.7 करोड़ टन वार्षिक है।
बस एक बात यहाँ खल रही है, PM को खुद देश को।सम्बोधित करते हुए सूचना देनी चाहिए। साथ ही समर्थन की अपील करनी चाहिए, भरोसे की इल्तज़ा तो दोनों ही तरफ से होती है, जनता क्या चाहे बस दो मीठे बोल…

