धीरेंद्र वर्मा

बाराबंकी,रामनगर वन रेंजमें थाना टिकैट नगर क्षेत्र में
प्रतिबंधित हरे पेड़ों के अवैध कटान के प्रतिदिन उजागर हो रहे मामले अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। जानकारी के मुताबिक आपको बताते चलें कि एक दिन पूर्व सकली का पुरवा बनगांव,गांव के पास स्थित एक बाग छोट्टन प्रधान की है जिसमें प्रतिबंधित देशी आम के वृक्षों को पूरी तरह से बगैर विभागीय परमिट के ठेकेदार द्वारा काट कर बेंच दिया गया है, जबकि ,5हरे भरे आम के पेड़ों की ऊपर की सभी डालियाँ उतार कर नीचे से काट दी गई हैं। इसके साथ ही एक डुन्डा पेड़ भी काटे जाने की पुष्टि हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि यह कटान ही नहीं इसी तरह और भी कई कटाने रात के समय बड़े पैमाने पर वन विभाग,व पुलिस की सांठगांठ से की जाती है, जिससे किसी को तत्काल जानकारी न मिल सके व रुकावट न पैदा हो।

▪️ डिप्टी रेंजर की मिली भगत में फल फूल रहा है गोरख धंधा वन विभाग कि अगर खबर प्रकाशित की जाती है तो वन विभाग के अधिकारी पत्रकार को खुलेआम देते हैं धमकी योगी सरकार में पत्रकार सुरक्षित नहीं है कमियां उजागर करें तो वन विभाग से पत्रकारों को किसी संगीत अपराध में फंसा देने मिलती है धमकी

इस प्रकरण में सबसे बड़ा आरोप क्षेत्र में तैनात स्थानीय वन दरोगा पर लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर पेड़ों का अवैध कटान हुआ है, वह वहीं रेंज का रहने वाला यह वन दरोगा है, और उसी की संलिप्तता में प्रतिदिन बगैर परमिट के कटान को अंजाम दिया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार वन दरोगा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए हरे पेड़ों को संरक्षित करने के बजाय कटान में सहयोग किया, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी नाराजगी फैल गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब पेड़ों की रक्षा करने वाला ही अवैध कटान में शामिल हो जाए, तो विभाग पर विश्वास कैसे किया जाए। लोगों का कहना है कि स्थानीय वन दरोगा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पेड़ों को कटवाया और किसी को इसकी सूचना भी नहीं दी। सूत्रों द्वारा ज्ञात हुआ कि प्रतिबंध आम के पेड़ काटने के बाद जेसीबी द्वारा पेड़ की
जड़ को रातों-रात गायब कर दिया जाता है डिप्टी रेंजर लकड़कतों के ऊपर मेहरबान है

▪️आक्रोश और कार्रवाई की मांग प्रधान की बाग में लगभग 10- आम के देसी पेड़ काटकर नष्ट कर दिए गए

पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों का कहना है कि नीम और डुन्डा जैसे पेड़ पर्यावरण संतुलन, पक्षियों के आवास और स्थानीय जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस प्रकार का कटान क्षेत्र की हरियाली को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि वन दरोगा पर तत्काल सस्पेंशन, विभागीय जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी अपने पद का गलत इस्तेमाल कर पर्यावरण को नुकसान न पहुंचा सके। वहीं इस प्रकरण में जिला वन प्रभागीय अधिकारी आकाशदीप बाघवान का कहना है कि उक्त प्रकरण में कार्यवाही की जाएगी जो वन कर्मी अवैध कटान में संलिप्त पाए जायेंगे उन पर भी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी

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