बाराबंकी जनपद के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में जमीन कब्जेदारी को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक महिला अपनी ही जमीन पर हक पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जमीन उनके नाम खतौनी में दर्ज होने के बावजूद दबंग विपक्षियों ने उस पर अवैध कब्जा कर रखा है और प्रशासन से शिकायत के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।


मामला जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के छुल्हा गांव का है। पीड़िता सरोज कश्यप का कहना है कि उनकी कृषि भूमि उनके नाम दर्ज है, लेकिन हाज़िहार गांव के कुछ लोगों ने उस पर जबरन कब्जा कर लिया है। पीड़िता के अनुसार, जब भी वह अपनी जमीन पर खेती करने या कब्जा हटाने की बात करती हैं, तो विपक्षी पक्ष उग्र हो जाता है और गाली-गलौज व मारपीट पर उतारू हो जाता है।


पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि विपक्षियों ने उनकी जमीन पर जबरन फसल भी बो दी है। जब उनकी बेटी खेत पर खेती करने पहुंची तो विपक्षी महिलाएं भी मौके पर पहुंच गईं और विवाद बढ़ गया। पीड़िता का यह भी कहना है कि विपक्षी पक्ष की महिलाएं—पत्नी और बेटियां—डंडा लेकर मौके पर पहुंच जाती हैं और डराने-धमकाने का प्रयास करती हैं। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें यह पूरा घटनाक्रम साफ तौर पर देखा जा सकता है।


पीड़िता का कहना है कि इस मामले में पहले भी दोनों पक्षों के बीच सुलह हुआ था, जिसमें यह तय हुआ था कि आगे केवल वही पक्ष खेती करेगा, जिसके नाम जमीन कागजों में दर्ज है। लेकिन सुलह के बावजूद विपक्षियों ने समझौते को दरकिनार करते हुए फिर से जमीन पर कब्जा कर लिया।
पीड़ित परिवार के मुताबिक राम सिंह, हंसराज, बृजेश, राम सिंह और सावित्री समेत कुछ लोगों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा भी दर्ज किया गया था, लेकिन इसके बावजूद आज तक जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया।


पीड़िता का कहना है कि उन्होंने न्याय के लिए कई बार प्रशासन और अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। एक ओर प्रदेश सरकार अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीन के कागज और खतौनी में नाम होने के बावजूद वह अपनी ही जमीन से वंचित हैं।


वहीं, इस पूरे मामले पर थाना अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद शुक्ल ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी और दोनों पक्षों को थाने पर बुलाया गया है, मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
न्याय न मिलने से हताश पीड़िता ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया, तो वह अपने खेत के सामने आत्मदाह करने को मजबूर होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार को उनका हक दिलाने के लिए ठोस कदम उठाता है।

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