महराजगंज/निचलौल: महराजगंज पुलिस महकमे में हाल ही में हुए फेरबदल के बाद निचलौल थाने की कमान संभालते ही थानाध्यक्ष मदन मोहन मिश्र सुर्खियों में आ गए हैं। लेकिन यह सुर्खियां कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नहीं, बल्कि कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों और विवादों को लेकर हैं। नवागत थानाध्यक्ष के आते ही क्षेत्र में पुलिस के व्यवहार से लेकर निष्पक्षता तक पर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं।

राजनैतिक द्वेष या पुलिसिया रौब?

ताजा मामला निचलौल नगर पंचायत के नाबालिग बच्चों के बीच हुई एक मामूली हाथापाई का है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने अपनी स्वतंत्र सहमति से थाने में सुलह कर ली थी। लेकिन मामला तब नाटकीय मोड़ ले लिया जब अचानक इस ठंडे पड़ चुके मामले में भाजपा जिला महामंत्री (युवा मोर्चा) व नगर पंचायत निचलौल के मनोनीत सभासद पवन श्रीवास्तव के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर दिया गया। स्थानीय जनता इस कार्रवाई को ईर्ष्या और राजनैतिक चश्मे से देख रही है। चर्चा है कि जब पक्षकार राजी थे, तो पुलिस ने किसके दबाव में या किस मंशा से इसे मुकदमे में तब्दील किया?

भगोड़े जालसाज पर मेहरबान खाकी!

एक तरफ राजनैतिक कार्यकर्ताओं पर त्वरित कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ₹3.50 लाख की धोखाधड़ी का शिकार हुआ पीड़ित दर-दर की ठोकरें खा रहा है। ग्राम बैदौली निवासी जितेंद्र यादव, जिस पर निचलौल समेत बरगदवा और नौतनवां थानों में पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, पुलिस की पकड़ से बाहर है।पीड़ित ने 16 अप्रैल 2026 को शिकायती पत्र देकर बताया था कि उसने बैंक से RTGS के माध्यम से पैसे दिए थे, जिसके पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं। बावजूद इसके, पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेना मुनासिब नहीं समझा।

बीट आरक्षी के बिगड़े बोल: ‘स्टाम्प पेपर की वैल्यू जीरो’

पुलिस की संवेदनहीनता का आलम यह है कि बैदौली बीट के आरक्षी सत्येन्द्र सिंह पीड़ित को न्याय दिलाने के बजाय कानूनी दस्तावेजों का मजाक उड़ा रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि आरक्षी ने दो टूक कहा— “मैं उसे लाकर फांसी नहीं चढ़ा दूंगा” और “स्टाम्प पेपर का मतलब जीरो होता है”। एक जिम्मेदार पुलिसकर्मी द्वारा कानूनी अनुबंध (Agreement) को शून्य बताना विभाग की छवि को धूमिल कर रहा है।

ट्विटर पर निर्देश, धरातल पर सन्नाटा:

इस मामले की गूंज सोशल मीडिया तक भी पहुँची। महराजगंज पुलिस को किए गए ट्वीट के जवाब में उच्चाधिकारियों ने थानाध्यक्ष निचलौल को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देशित भी किया, लेकिन थानाध्यक्ष ने शायद ऊपर के आदेशों को ठंडे बस्ते में डालना ही बेहतर समझा। अब तक आरोपी के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई न होना पुलिस और अपराधियों के बीच की ‘साठगांठ’ की ओर इशारा कर रहा है।

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