एम डी न्यूज़ बरेली
बरेली के इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में शनिवार को 27वीं प्रसार परिषद की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण को मजबूत करना रहा। बैठक में ओडिशा सरकार ने आईवीआरआई को ‘नॉलेज पार्टनर’ बनाने का प्रस्ताव दिया। बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक और संस्थान के निदेशक राघवेंद्र भट्टा ने शोध और खेत के बीच की दूरी को कम करने में विस्तार सेवाओं की अहम भूमिका बताई। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों और अटारी के माध्यम से तकनीकों के प्रसार को प्रभावी बनाने, प्रशिक्षण बढ़ाने और किसानों से मिले फीडबैक के आधार पर सुधार करने पर बल दिया।

भट्टा ने संस्थान की दृश्यता बढ़ाने के लिए ‘ओपन डे’, लघु वीडियो और स्कूल-कॉलेजों से संवाद जैसे नवाचार अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रसार गतिविधियों के प्रभाव आकलन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं विकसित करने की आवश्यकता जताई। सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार) आर.आर. बर्मन ने संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, जैविक खाद और बायोफर्टिलाइजर के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। बर्मन ने वर्ष 2030 तक उर्वरक उपयोग में 25 फीसदी कमी के लक्ष्य का भी जिक्र किया। प्रसार शिक्षा विभागाध्यक्ष एच.आर. मीना ने बताया कि पिछली बैठक की 18 सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया जा चुका है। संयुक्त निदेशक रूपसी तिवारी ने जानकारी दी कि संस्थान ने पिछले वर्ष 15,521 प्रसार गतिविधियों के माध्यम से करीब 1.45 लाख लाभार्थियों तक पहुंच बनाई, जिसमें महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए फार्म स्कूल, प्रशिक्षण, परामर्श सेवाएं और तकनीकी साहित्य विकसित किए जा रहे हैं। अगले तीन वर्षों में किसानों की प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए ‘पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज’ तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कानपुर के निदेशक राघवेंद्र सिंह ने आईवीआरआई द्वारा विकसित पशु विज्ञान के ‘पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज’ को कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने जैविक इनपुट्स और मृदा कार्बन सुधार को भी महत्वपूर्ण बताया। रूपसी तिवारी ने युवाओं को पशुपालन क्षेत्र में कॅरिअर और स्टार्टअप के अवसरों से जोड़ने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने की बात कही। बैठक में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने वैक्सीन विकास, सस्ती निदान तकनीक और पशु पोषण सुधार पर काम तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रिसिजन पशुपालन तकनीकों को भी महत्वपूर्ण बताया।
रिपोर्टर गौरव सक्सेना एम डी न्यूज़ बरेली
