निर्धारित मूल्य ₹266.50 प्रति बोरी, किसानों से ₹270 तक वसूले जाने का आरोप; जांच की मांग

लखीमपुर – फूलबेहड़। जनपद लखीमपुर खीरी में विकास खंड फूलबेहड़ के चंद कदमों पर सहकारी समिति में खाद वितरण के दौरान अनियमितता और कालाबाजारी के आरोप सामने आने से किसानों में भारी नाराज़गी है। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित मानक और मूल्य सूची का पालन नहीं किया जा रहा है। खाद की बोरी, जिसका निर्धारित विक्रय मूल्य ₹266.50 है, उसे किसानों को ₹270 या उससे अधिक कीमत पर दिया जा रहा है। किसानों ने इसे सीधे तौर पर अवैध वसूली और नियमों का उल्लंघन बताया है।
किसानों के अनुसार सहकारी समितियों का संचालन किसानों को उचित मूल्य पर खाद, बीज और कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जाता है। शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक समिति पर खाद की उपलब्धता, स्टॉक और मूल्य सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होना अनिवार्य है। साथ ही किसानों को निर्धारित दर पर ही खाद उपलब्ध कराना समिति की जिम्मेदारी होती है। लेकिन कई किसानों ने आरोप लगाया कि समिति में इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि खाद वितरण के दौरान पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है। किसानों को न तो स्पष्ट रसीद दी जा रही है और न ही निर्धारित मूल्य की जानकारी खुलकर प्रदर्शित की जा रही है। कुछ किसानों ने आरोप लगाया कि अतिरिक्त राशि न देने पर उन्हें खाद उपलब्ध नहीं कराई जाने की धमकी दी या फिर कई दिनों तक चक्कर लगवाए जाते हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
खाद वितरण के प्रमुख मानक
-खाद की बिक्री शासन द्वारा निर्धारित मूल्य पर ही की जानी चाहिए।
-प्रत्येक समिति पर मूल्य सूची और स्टॉक बोर्ड प्रदर्शित होना अनिवार्य है।
किसानों को खरीद की रसीद देना आवश्यक है।
स्टॉक रजिस्टर और बिक्री रजिस्टर का नियमित रखरखाव होना चाहिए।
किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वसूली नियम विरुद्ध मानी जाती है।
किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारियों द्वारा किसानों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है। खेती के सीजन में खाद की मांग अधिक होने के कारण किसान मजबूरी में अतिरिक्त पैसा देने को तैयार हो जाते हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय पर खाद नहीं मिलेगी तो फसल उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने कहा कि समिति के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रिकॉर्ड और भुगतान विवरण की जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। साथ ही दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
टोल फ्री सहकारी समिति के प्रति शिकायत दर्ज कराई गई है तो मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि निर्धारित मानकों का उल्लंघन या अतिरिक्त वसूली की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
किसानों का कहना है कि सहकारी समितियां किसानों की सहायता के लिए बनाई गई हैं, लेकिन यदि वहीं भ्रष्टाचार और कालाबाजारी का केंद्र बन जाएं तो किसानों का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
अंशू तिवारी
