बहुयामी समाचार एम डी न्यूज के लिए वाइस ब्यूरो चीफ अखिलेश राजपूत की खास रिपोर्ट।

मस्तियापुर कन्नौज/बताते चले कि ब्रजकिशोर शास्त्री जी माध्यम से गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा भगवान श्रीकृष्ण और देवराज इंद्र के अहंकार से जुड़ी है। इसके अनुसार, भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र की बजाय गायों और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया इससे क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलाधार बारिश की, तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर
गोवर्धन लीला की संपूर्ण कथा ब्रजकिशोर शास्त्री जी के माध्यम से पूजा कराई गई। इंद्र की पूजा का विरोध: द्वापर युग में ब्रजवासी अच्छी बारिश और फसल के लिए हर साल देवराज इंद्र की पूजा करते थे। एक दिन बाल कृष्ण ने इसका कारण पूछा और बताया कि हमें इंद्र की बजाय मस्तियापुर वासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि यही हमें अन्न और गायों को चारा प्रदान करता है। सभी ब्रजवासियों ने उनकी बात मानकर गोवर्धन की पूजा शुरू कर दी।
इंद्र का प्रकोप: अपनी पूजा बंद होने से देवराज इंद्र को अहंकार हो गया और उन्होंने ब्रज का विनाश करने के लिए ‘संवर्तक’ नामक बादलों को मूसलाधार बारिश और तूफान लाने की आज्ञा दी। चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई।
गोवर्धन पर्वत को उठाना: ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी बाईं हाथ की छोटी उंगली (कनिष्ठा) पर उठा लिया। सभी ब्रजवासी और गायें पर्वत के नीचे आ गए ।कृष्ण के सुदर्शन चक्र के प्रभाव से किसी भी ब्रजवासी पर पानी की एक बूंद भी नहीं पड़ी।
इंद्र का अहंकार टूटना: लगातार सात दिनों तक बारिश करने के बाद भी जब इंद्र का कुछ नहीं बिगड़ा, तो उन्हें भगवान कृष्ण की दिव्य शक्तियों का आभास हुआ ।उन्हें अपनी गलती का पश्चाताप हुआ और उन्होंने कृष्ण से क्षमा याचना की।
अन्नकूट की शुरुआत: सातवें दिन, कृष्ण ने पर्वत को नीचे रखा इसके बाद ब्रजवासियों ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए तरह-तरह के पकवान बनाकर गोवर्धन पर्वत को भोग लगाया।
बहुयामी समाचार एम डी न्यूज के माध्यम से वाइस ब्यूरो चीफ अखिलेश राजपूत खबर के माध्यम दिखाई गई कमेटी सदस्य टीम, विपिन कुमार, कल्याण सिंह, शिवा राजपूत, सचिन कुमार, कल्लू अभिषेक राजपूत, महेश राजपूत, प्रदीप कुमार यादव, रामपाल राजपूत, अनुज कुमार, अरविंद कुमार, दीपू सिंह, विनोद कुमार, अनुराग राजपूत, मोहित कुमार, ग्रीस राजपूत, रामदत्त लालू, शिवम राजपूत, मनोज कुमार, कुलदीप मैनेजर, मनोज पछुवा, कुलदीप ठेकेदार, हीरालाल, मोहित वर्मा, सुमित बच्चा, मुन्नू सिंह मनोज, कमलेश सुशील खुन्ना, आदि सदस्यों की टीम सम्पन्न हुई भागवत कथा
