प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य योग्यता माना जाने वाला ‘डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन’ (D.El.Ed) अब अभ्यर्थियों को आकर्षित करने में नाकाम साबित हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों से लगातार इस कोर्स के प्रति छात्रों का रुझान घट रहा है, जिसके चलते इस साल राज्य में रिकॉर्ड संख्या में सीटें खाली रह गई हैं।लेट लतीफी का आलम यह रहा कि सत्र विलंबित होने के कारण वर्ष 2025 की प्रवेश प्रक्रिया साल 2026 में जाकर पूरी हो सकी। इसके बावजूद प्रवेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है।


कुल सीटों में से केवल 90 हजार पर ही प्रवेश


​आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) और निजी डीएलएड कॉलेजों को मिलाकर कुल 2,39,500 सीटें मौजूद हैं। इनमें से इस बार महज 90 हजार सीटों पर ही एडमिशन हो पाए हैं, जबकि करीब 1.49 लाख सीटें पूरी तरह से खाली रह गईं।


प्रदेश में चल रहे डीएलएड संस्थानों का ढांचा कुछ इस प्रकार है:
​सरकारी संस्थान (DIET): कुल 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (वाराणसी के ‘कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन’ समेत)।
​निजी संस्थान: 3,046 प्राइवेट डीएलएड कॉलेज।
​अल्पसंख्यक कॉलेज: 258 संस्थान।


सरकारी कॉलेजों (DIET) का भी बुरा हाल


​हैरानी की बात यह है कि इस बार सरकारी डाइट (DIET) संस्थानों की भी शत-प्रतिशत सीटें नहीं भर सकीं। कुल 67 डाइट संस्थानों में से 14 संस्थान ऐसे हैं, जहां आधी से ज्यादा सीटें खाली रह गईं। पूरे प्रदेश के डाइट संस्थानों में कुल 10,600 सीटें स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल 7,198 सीटों पर प्रवेश हुआ और 3,402 सीटें खाली रह गईं।

क्यों घट रहा है डीएलएड का क्रेज?


​विशेषज्ञों का मत: शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि साल 2018 के बाद से उत्तर प्रदेश में कोई नई ‘बेसिक शिक्षक भर्ती’ (Primary Teacher Recruitment) नहीं आई है। लंबे समय से भर्ती न आने और रोजगार के अन्य विकल्प सीमित होने के कारण युवाओं का रुझान इस डिप्लोमा कोर्स से तेजी से खत्म हो रहा है।

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