तराई के जनपदों में विषम परिस्थितियों के बीच जनगणना कार्य में जुटे शिक्षामित्र और संविदा कर्मचारीविशेष ब्यूरो, उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के जनपदों में इन दिनों राष्ट्रीय जनगणना अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षामित्र (संविदा कर्मचारी) और सहायक शिक्षक कर्मचारी पूरी निष्ठा से जुटे हुए हैं। भारत-नेपाल सीमा से सटे इन दुर्गम और तराई इलाकों में भीषण गर्मी, भौगोलिक चुनौतियों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद ये कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ बनीं बड़ी चुनौतीतराई क्षेत्र के जिलों—जैसे लखीमपुर खीरी, बहराइच, पीलीभीत, बलरामपुर और श्रावस्ती—में कई गांव नदियों के किनारे या घने जंगलों के बीच बसे हैं। नेटवर्क की समस्या, कच्चे रास्ते और जंगली जानवरों के खतरे के बीच ये संविदा कर्मचारी रोज़ाना कई किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। बिना किसी विशेष वाहन भत्ते या अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था के, ये प्रगणक डिजिटल और मैन्युअल दोनों माध्यमों से डेटा फीडिंग का काम पूरा कर रहे हैं।शिक्षामित्र संगठनों ने उठाई मांगेंइस अभियान के बीच उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ और अन्य कर्मचारी संगठनों ने प्रशासन के सामने कुछ गंभीर चिंताएं और मांगें भी रखी हैं:दूरी की समस्या: कई कर्मचारियों की ड्यूटी उनके मूल निवास या कार्यस्थल से 50 से 80 किलोमीटर दूर दराज के क्षेत्रों में लगा दी गई है, जिससे आवागमन में भारी समस्या आ रही है।प्रशिक्षण का अभाव: संगठनों का आरोप है कि कई शिक्षामित्रों को बिना उचित तकनीकी प्रशिक्षण के ही प्रगणक बनाकर फील्ड में उतार दिया गया है।मानसिक और आर्थिक दबाव: मानदेय की अनिश्चितता और अत्यधिक कार्यभार के कारण कर्मचारियों में मानसिक तनाव की स्थिति बनी हुई है।संगठनों की मुख्य मांगें:शिक्षामित्रों को उनकी अपनी या नजदीकी ग्राम पंचायत में ही जनगणना की जिम्मेदारी दी जाए।जून के महीने में कार्य करने के बदले उन्हें पूरा सुरक्षा कवर और नियमानुसार आधा माह का अतिरिक्त मानदेय सुनिश्चित किया जाए।दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात महिला शिक्षामित्रों की सुरक्षा और परिवहन के पुख्ता इंतजाम हों।प्रशासन का कड़ा रुखदूसरी ओर, शासन और जिला प्रशासन ने इस राष्ट्रीय अभियान को समय से पूरा करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। लापरवाही बरतने या किट प्राप्त न करने वाले कुछ शिक्षकों और शिक्षामित्रों के खिलाफ कार्रवाई व वेतन रोकने जैसे कड़े कदम भी उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो और राष्ट्रीय महत्व का यह कार्य शुचिता के साथ पूरा हो, इसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा।सीमित संसाधनों और अल्प मानदेय के बावजूद, उत्तर प्रदेश के इन संविदा कर्मचारियों का यह प्रयास देश के विकास के इस महा-अभियान में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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