धर्मेन्द्र कसौधन/ब्यूरो
महराजगंज। चिकित्सा क्षेत्र में ज्ञानवर्धन और गंभीर बीमारियों के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और नीमा (NIMA) के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (CME) का आयोजन किया गया। मैक्स कैंसर हॉस्पिटल के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम को दो मुख्य सत्रों में विभाजित किया गया, जिसमें कैंसर जागरूकता, आधुनिक रोबोटिक सर्जरी और सौ दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान पर देश के जाने-माने विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

प्रथम सत्र: कैंसर की शीघ्र पहचान और रोबोटिक सर्जरी पर जोर
कार्यक्रम के पहले सत्र की शुरुआत कैंसर जागरूकता और उसकी आधुनिक उपचार तकनीकों पर चर्चा के साथ हुई।
मुख्य वक्ता: मैक्स कैंसर हॉस्पिटल के डॉ. शशांक चौधरी।
मुख्य बिंदु: डॉ. चौधरी ने कैंसर के शुरुआती लक्षणों, डायग्नोसिस (जांच) और नवीनतम रोबोटिक सर्जरी तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया।
विशेष संदेश: उन्होंने जोर देकर कहा कि कैंसर के इलाज में ‘अर्ली डायग्नोसिस’ (शीघ्र पहचान) ही सबसे बड़ा हथियार है। अगर शुरुआती स्टेज में बीमारी का पता चल जाए, तो शत-प्रतिशत सफल इलाज संभव है। देरी होने पर उपचार जटिल हो जाता है। उन्होंने चिकित्सकों से आमजन को नियमित हेल्थ चेकअप के लिए प्रेरित करने की अपील की।
सम्मान: सत्र के अंत में दूर-दराज से आए मुख्य वक्ता डॉ. शशांक चौधरी को आईएमए एवं नीमा के पदाधिकारियों द्वारा स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) देकर सम्मानित किया गया।

द्वितीय सत्र: सौ दिवसीय टीबी उन्मूलन और बोन टीबी पर विमर्श
दूसरा सत्र भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘सौ दिवसीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम’ को समर्पित रहा। इस सत्र का कुशल संचालन डॉ. डी.के. साहनी द्वारा किया गया।
फेफड़ों की टीबी (Pulmonary TB): विशेषज्ञ डॉ. निषांत कुमार ने फेफड़ों की टीबी के लक्षण, आधुनिक जांच विधियों और इसके सटीक इलाज के प्रोटोकॉल की जानकारी दी।
हड्डियों की टीबी (Bone TB): डॉ. डी.के. साहनी ने बोन टीबी के कारणों, उसकी पहचान में आने वाली चुनौतियों और उपचार पद्धतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

’टीबी मुक्त भारत’ के लिए जिला क्षय रोग अधिकारी की अपील
जिला टीबी उन्मूलन अधिकारी डॉ. वीरेंद्र आर्य ने संगोष्ठी में मौजूद सभी डॉक्टरों से राष्ट्रव्यापी अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत के सपने को साकार करने के लिए गरीब और जरूरतमंद मरीजों को न केवल सही समय पर चिकित्सा मिलनी चाहिए, बल्कि उनके लिए पौष्टिक आहार (निक्षय पोषण योजना के तहत) सुनिश्चित करने में भी डॉक्टरों को सहयोग करना होगा।

पदाधिकारियों और चिकित्सकों का हुआ सम्मान
इस गरिमामयी कार्यक्रम में चिकित्सा जगत के प्रति उत्कृष्ट योगदान के लिए आईएमए और नीमा के प्रमुख पदाधिकारियों को पौधा एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे:
डॉ. ए.एच. खुसरो (अध्यक्ष, आईएमए)
डॉ. डी.के. साहनी (सचिव, आईएमए)
डॉ. ए.के. गुप्ता (कोषाध्यक्ष, आईएमए)
डॉ. पारुल पांडेय (संयुक्त सचिव, आईएमए)
डॉ. राकेश राय कौशिक (अध्यक्ष, नीमा)
डॉ. राजीव मद्देशिया (सचिव, नीमा)
डॉ. शाहबाज (कोषाध्यक्ष, नीमा)
डॉ. भरत ठाकुर श्रीवास्तव (संरक्षक, आईएमए)
50 से अधिक चिकित्सकों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस शैक्षणिक कार्यशाला (CME) में क्षेत्र के लगभग 50 से अधिक वरिष्ठ एवं युवा चिकित्सकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. तनवीर, डॉ. पी.के. श्रीवास्तव, डॉ. कृष्णा साहनी, डॉ. इज़हारुल हक, डॉ. अबरार, डॉ. बी.एन. पांडेय, डॉ. राघवेंद्र मिश्रा, डॉ. नंदिता मिश्रा, डॉ. अफसाना, डॉ. तौसीफ, डॉ. एस.जेड. आब्दीन, डॉ. प्रीति मद्धेशिया, डॉ. शाहीन और डॉ. रश्मि श्रीवास्तव सहित कई अन्य गणमान्य डॉक्टर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों द्वारा मुख्य वक्ताओं, आगंतुक अतिथियों और सभी प्रतिभागी चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
