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लोकेशन रामपुर
ब्यूरो चीफ रफीउल्लाह खान की रिपोर्ट
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतों को गिराए जाने के सरकारी आदेश पर अपनी गहन चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी भी सरकार को छात्रों के भविष्य और शैक्षणिक संस्थानों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

मीडिया के लिए जारी अपने बयान में कहा गया कि शैक्षणिक संस्थान राष्ट्रीय संपत्ति होते हैं, जो वर्षों के सामूहिक प्रयास और जनता के विश्वास से अस्तित्व में आते हैं। ऐसा कोई भी कदम, जिससे हजारों छात्रों की शिक्षा प्रभावित होने का खतरा हो, उसे अत्यंत सावधानी, न्याय और संवेदनशीलता के साथ उठाया जाना चाहिए। मलिक मुतासिम खान ने कहा कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के विध्वंस से संबंधित प्रशासन के फैसले ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और पूरे शैक्षणिक समुदाय में गहन चिंता पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि कानूनी मामले अपनी जगह हैं, लेकिन यह आवश्यक है कि छात्रों की शिक्षा, परीक्षाएं और उनका भविष्य हर हाल में सुरक्षित रखा जाए। मलिक मुतासिम खान ने सवाल किया कि यदि वास्तव में विध्वंस आदेश का आधार अवैध निर्माण हैं, तो फिर यही मानदंड देश के अन्य सभी शैक्षणिक संस्थानों पर समान रूप से क्यों लागू नहीं किया जा रहा है? केवल इसी यूनिवर्सिटी को निशाना बनाकर भेदभावपूर्ण व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
उन्होंने आगे कहा कि यह दावा कि यूनिवर्सिटी की इमारतें उस समय बनाई गई थीं, जब यह क्षेत्र रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था, इसकी निष्पक्ष जांच पारदर्शी तरीके से जनता के सामने प्रस्तुत की जानी चाहिए। साथ ही सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इसी प्रकार के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ समान कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। कानून का एकतरफा क्रियान्वयन जनता के विश्वास को आहत करता है। संविधान में दिए गए समानता के सिद्धांत को कमजोर करता है और भेदभावपूर्ण रवैये का आभास देता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नियम का उल्लंघन हुआ है, तो कानून के अनुसार यूनिवर्सिटी प्रशासन पर जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन सैकड़ों छात्रों और शिक्षकों वाले एक सक्रिय यूनिवर्सिटी की इमारतों को गिराना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
इस अवसर पर मरकज़ जमाअत-ए-इस्लामी हिंद से मौलाना मोहम्मद अहमद साहब, मौलाना शफी मदनी साहब, अमीर-ए-क़ायद ज़मीरुल हसन खान फ़लाही साहब, नाज़िम-ए-ज़िला उसाफ़ खान फ़लाही साहब, अमीर-ए-मुक़ामी अब्दुस्सलाम बस्तवी साहब, फैसल ज़फर साहब, हसानुद्दीन खान नदवी साहब, वसीम फ़लाही साहब, कलीम साहब, नदीम मुंतज़िर साहब और फ़रीद साहब उपस्थित रहे।
