टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर जिले के शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार के निर्णय के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन मजिस्ट्रेट को सौंपा।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना था कि वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में राइट टू एजुकेशन (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

शिक्षकों ने बताया कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विभिन्न राज्यों की ओर से याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं।
शिक्षकों का आरोप है कि वर्ष 2017 के बाद लागू किए गए प्रावधानों के माध्यम से पुराने शिक्षकों पर भी टीईटी उत्तीर्ण करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे शिक्षकों पर थोपा जा रहा “काला कानून” बताते हुए इसका विरोध किया।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा सड़क से लेकर संसद तक अपनी आवाज बुलंद की जाएगी।


प्रदर्शन के उपरांत शिक्षकों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन मजिस्ट्रेट को सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया।
इस मौके पर जिलाध्यक्ष विवेक कुमार शुक्ला और महामंत्री अभिषेक कुमार तिवारी आदि शिक्षक मौजूद रहे।

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