चन्दौली: आगामी मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से गुरुवार को मुगलसराय कोतवाली परिसर में पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता एडीएम राजीव मोहन सक्सेना ने की। इस दौरान क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार सिंह एवं प्रभारी निरीक्षक विजय प्रताप सिंह ने ताजियेदारों, अखाड़ेदारों तथा गणमान्य नागरिकों के साथ विस्तृत चर्चा की।बैठक में नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आए ताजियेदारों, अखाड़ेदारों, सभासदों, ग्राम प्रधानों और समाजसेवियों ने मुहर्रम जुलूस एवं ताजिया दफन से संबंधित समस्याओं और सुझावों को प्रशासन के समक्ष रखा। धर्मशाला के सामने सड़क चौड़ीकरण कार्य के चलते मार्ग बंद होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। ताजियेदारों ने बताया कि मार्ग बंद होने से जुलूस को लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा, जिससे लोगों को असुविधा हो सकती है। प्रशासन ने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी ताजियों की अधिकतम ऊंचाई 10 फीट होगी। अधिकारियों ने जुलूसों के संचालन एवं समापन का समय निर्धारित करने पर जोर देते हुए आयोजकों से समय-सारिणी प्रशासन को उपलब्ध कराने की अपील की, ताकि सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित की जा सके।दुल्हीपुर निवासी राहिब जाफरी ने मुहर्रम के दौरान आयोजित मजलिसों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि रात्रिकालीन कार्यक्रमों में महिलाओं एवं बच्चियों की भागीदारी रहती है, इसलिए बिजली कटौती से सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। प्रशासन ने बिजली विभाग से समन्वय स्थापित कर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का भरोसा दिया। क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मुहर्रम जुलूस में भाला, तलवार या किसी भी प्रकार के हथियारों का प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही धार्मिक स्थलों के सामने जुलूस को अनावश्यक रूप से रोकने और किसी भी विवादित गतिविधि से बचने की अपील की गई। बैठक में मौजूद इफ्तेखार खान ने सभी ताजियेदारों एवं अखाड़ेदारों से निर्धारित समय का पालन करते हुए रात्रि 9 बजे तक ताजियों को कर्बला पहुंचाने की अपील की। प्रशासन ने निर्देश दिया कि प्रत्येक ताजियेदार अपने साथ कम से कम 10 स्वयंसेवक रखें, जो जुलूस के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। इसके अलावा अखाड़ा प्रदर्शन में आगजनी, खतरनाक करतब एवं सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। बैठक के अंत में अधिकारियों ने कहा कि मुहर्रम त्याग, बलिदान और आपसी सद्भाव का पर्व है। इसे हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे के साथ मनाया जाए। सभी उपस्थित लोगों ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने तथा पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने का आश्वासन दिया।

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