रिपोर्ट जितेंद्र ठाकुर आगरा मंडल ब्यूरो प्रमुख
मथुरा/गोवर्धन। विश्व प्रसिद्ध गोवर्धन मुड़िया पूनों मेले की व्यवस्थाओं को लेकर आयोजित की गई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब बंद सभागार में चल रही बैठक से पत्रकारों को बाहर निकाल दिया गया। इस व्यवहार से नाराज स्थानीय पत्रकारों ने बैठक का पूर्ण रूप से बहिष्कार कर दिया और प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त किया।

तहसील सभागार में बंद कमरे में हुई बैठक
गोवर्धन के तहसील सभागार में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण मुड़िया मेले की तैयारियों को लेकर सभी विभागों के आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक में जिलाधिकारी (DM), sp,सहित जिले के तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद थे। करोड़ों भक्तों की आस्था और जनता की सुविधाओं से जुड़े इस बेहद महत्वपूर्ण मेले की बैठक बंद सभागार में चल रही थी।

अधिकारियों के चहेतों को एंट्री, पत्रकारों को नो-एंट्री
आरोप है कि बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद सभागार से मीडियाकर्मियों को बाहर जाने के लिए कह दिया गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि जहां एक तरफ लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारों को बैठक से दूर रखा गया, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों के करीबियों और चहेतों को मीटिंग के अंदर आराम से बैठने की इजाजत मिली हुई थी।
कमियां छुपाने का आरोप, पत्रकारों में आक्रोश
बैठक से बाहर निकाले जाने पर गोवर्धन के पत्रकारों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। मीडियाकर्मियों का सीधा आरोप है कि प्रशासन मेले की अधूरी तैयारियों और अपनी कमियों को छुपाने के लिए पत्रकारों को बैठक से दूर रख रहा है ताकि जमीनी हकीकत जनता के सामने न आ सके। इस तानाशाही रवैये से क्षुब्ध होकर गोवर्धन के सभी पत्रकारों ने बैठक की कवरेज न करने का फैसला लेते हुए इसका पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया।
गौरतलब है कि मुड़िया मेले में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु गोवर्धन आते हैं और ऐसे महापर्व की व्यवस्थाओं से जुड़ी बैठक में इस प्रकार का तालमेल का अभाव प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
