धर्मेन्द्र कसौधन/राष्ट्रीय ब्यूरो
लखनऊ। राज्य सरकार ने प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा क्षेत्र से जुड़े शिक्षकों को एक बड़ी राहत दी है। राजकीय और सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों के बाद अब उत्तर प्रदेश के 2,500 से अधिक वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 3.50 लाख शिक्षकों को भी ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ के तहत कैशलेस स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलने जा रहा है।
शासन ने इस योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को शिक्षकों के चिह्नांकन और पोर्टल पर उनका ऑनलाइन पंजीकरण शुरू कराने का स्पष्ट निर्देश जारी कर दिया है।

फरवरी में हुई थी शुरुआत, अब प्रक्रिया को मिली रफ्तार
उल्लेखनीय है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा फरवरी 2026 में राजकीय और एडेड विद्यालयों के लिए इस योजना की शुरुआत की गई थी। उस समय वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध न होने के कारण उनके चिह्नांकन के लिए अलग से व्यवस्था करने की बात कही गई थी। इसी कड़ी में अब विशेष सचिव (माध्यमिक शिक्षा) उमेश चंद्र की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।

आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया: तीन चरणों में होगी जांच
योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से पात्र शिक्षकों तक पहुंचाने के लिए एक स्पष्ट सत्यापन प्रक्रिया निर्धारित की गई है:
- शिक्षक द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण: शिक्षक को स्वयं और अपने आश्रितों का विवरण योजना के लिए विशेष रूप से विकसित पोर्टल पर अपने आधार कार्ड की जानकारी के अनुसार दर्ज करना होगा।
- प्रधानाचार्य का सत्यापन: आवेदन प्राप्त होने पर संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक या प्रधानाचार्य यह जांचेंगे कि शिक्षक की नियुक्ति नियमों के अनुसार हुई है और वे वर्तमान में कार्यरत हैं या नहीं। सत्यापन के बाद ही आवेदन आगे भेजा जाएगा।
- डीआईओएस (DIOS) का अंतिम अनुमोदन: प्रधानाचार्य द्वारा प्रमाणित आवेदनों का अंतिम सत्यापन और अनुमोदन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस-द्वितीय) द्वारा किया जाएगा।
सेवा से हटने पर योजना से बाहर होंगे शिक्षक
जारी आदेश के अनुसार, यदि कोई शिक्षक किसी कारणवश विद्यालय की सेवा से अलग होता है, तो इसकी सूचना प्रधानाचार्य द्वारा तुरंत डीआईओएस को दी जाएगी। ऐसे शिक्षकों को योजना के लाभ से बाहर कर दिया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को इस संबंध में तत्काल आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए हैं। सरकार के इस कदम से प्रदेश के लाखों वित्तविहीन शिक्षकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का एक बड़ा संबल मिलेगा।
