लखीमपुर खीरी/धौरहरा।बहु-आयामी पार्टी (बी.ए.पी.) ने तराई क्षेत्र की महत्वाकांक्षी मैलानी-बहराइच रेल परियोजना के नए संरेखण (Alignment) को लेकर केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ बेहद गंभीर नीतिगत आपत्तियां दर्ज कराते हुए मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय सचिव द्वारा रेल मंत्री, पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक (GM) और लखीमपुर खीरी व बहराइच के जिलाधिकारियों को एक अत्यंत गंभीर मांग-पत्र (ज्ञापन) भेजकर रेलवे रूट में बड़े स्तर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और क्षेत्रीय भेदभाव का आरोप लगाया है।तिकुनिया कांड का डैमेज कंट्रोल और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोपबहु-आयामी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने जारी बयान में कहा कि रेल मंत्रालय द्वारा हाल ही में स्वीकृत मैलानी-भीरा-निघासन-पलिया-बहराइच बड़ी लाइन परियोजना का जो खाका खींचा गया है, वह तकनीकी कमियों का पुलिंदा और एक खास राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित है। पार्टी का आरोप है कि धौरहरा जैसे मुस्लिम बहुल आबादी वाले ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्र को जानबूझकर आधुनिक विकास और रेल नेटवर्क से वंचित किया जा रहा है। एक तरफ निघासन-तिकुनिया जैसे क्षेत्रों को रेलवे लाइन देकर बहुसंख्यक मतदाताओं को खुश करने (Appeasement) का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ धौरहरा के अल्पसंख्यकों को परिवहन के साधनों से काटकर आर्थिक रूप से पंगु बनाने की सांप्रदायिक साजिश रची जा रही है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का खुला उल्लंघन है। पार्टी ने इसे 2027 के विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए फेंका गया ‘चुनावी लॉलीपॉप’ करार दिया है।वन-प्रशासनिक भ्रष्टाचार और वन्यजीवों के नाम पर झूठ का खेलमांग-पत्र में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि रेलवे और वन विभाग का यह दावा पूरी तरह भ्रामक है कि पुरानी छोटी लाइन पर सैकड़ों वन्यजीव ट्रेन से कटकर मर रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड गवाह हैं कि पिछले 10 वर्षों में ट्रेन की चपेट में आने वाले वन्यजीवों की संख्या इकाई (Single Digit) में है, जबकि तराई के गांवों में प्रतिवर्ष औसतन 40 से 50 सीमांत किसान और मजदूर दुधवा के हिंसक बाघों और तेंदुओं के हमलों में अपनी जान गंवाते हैं। सरकार इन्हें मुआवजा देने के बजाय रेल लाइन बंद करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहती है।पार्टी का आरोप है कि मैलानी-दुधवा-नानपारा के मुख्य यात्री मार्ग को बंद करने के पीछे वन विभाग और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की एक गहरी आर्थिक साजिश है। यदि यह रूट बंद होता है, तो कोर जोन में अंतरराष्ट्रीय तस्करों के साथ मिलकर कीमती जड़ी-बूटियों व वन्यजीवों की अंगों की तस्करी का रास्ता साफ हो जाएगा, साथ ही शारदा और सुहेली नदी के किनारों पर करोड़ों रुपये का अवैध बालू खनन (Illegal Sand Mining) बिना किसी निगरानी के फलेगा-फूलेगा।धौरहरा की उपेक्षा पर 18 किलोमीटर का सचप्रशासन का यह तर्क पूरी तरह निराधार है कि धौरहरा को जोड़ने के लिए 18 किलोमीटर लंबा पुल बनाना पड़ेगा या दलदल पाटना पड़ेगा। तकनीकी हकीकत यह है कि 18 किलोमीटर का पूरा पैच लगातार पुल का नहीं है, केवल शारदा नदी के एक सीमित हिस्से पर पुल की आवश्यकता है। बाकी 90% हिस्सा सामान्य मैदानी और कृषि भूमि है, जिसे महज रेलवे ट्रैक को थोड़ा सा मोड़कर (Route Diversion) आसानी से धौरहरा कस्बे तक पहुंचाया जा सकता है।बहु-आयामी राजनीतिक पार्टी की प्रमुख मांगें:रूट में संशोधन: निघासन से आगे बढ़ रहे ट्रैक के संरेखण (Alignment) को तुरंत संशोधित कर शारदा नदी पर आधुनिक पुल का निर्माण किया जाए और धौरहरा कस्बे को बड़ी लाइन के मुख्य रूट से अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए।एकीकृत महा-परियोजना: शाहजहांपुर-मोहम्मदी-गोला गोकर्णनाथ मार्ग को इस तराई कॉरिडोर का हिस्सा बनाकर ‘एकीकृत महा-परियोजना’ लागू की जाए।यात्री ट्रेनें बहाल हों: दुधवा होकर जाने वाले पुराने मीटर गेज मार्ग पर आदिवासियों, दूध और मत्स्य उत्पादकों के व्यापार को बचाने के लिए प्रतिदिन कम से कम दो जोड़ी रियायती यात्री ट्रेनें जारी रखी जाएं।उच्च स्तरीय न्यायिक जांच: दुधवा के कोर जोन में ट्रैक बंद करने के नाम पर भू-माफियाओं, बालू तस्करों और भ्रष्ट अधिकारियों के बीच चल रही सांठगांठ की माननीय उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच कराई जाए।व्यापक संवैधानिक जन-आंदोलन की चेतावनीबहु-आयामी पार्टी ने साफ चेतावनी दी है कि यह ज्ञापन केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि तराई की शोषित, उपेक्षित और अल्पसंख्यक जनता का इम्तिहान है। यदि थारू आदिवासियों और क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए लिखित सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो पार्टी लखीमपुर खीरी से लेकर बहराइच तक एक व्यापक और उग्र ‘संवैधानिक जन-आंदोलन’ शुरू करने को बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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