Month: May 2022

सहसवान तहसील सभागार में एडीएम वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में किया गया संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन

बदायूं जनपद के सहसवान तहसील सभागार में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व नरेंद्र बहादुर सिंह की अध्यक्षता में आज संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया । इसमें अपर पुलिस…

मुख्य विकास अधिकारी ने अकोढ़ी बबुरा मार्ग पर निर्माणाधीन सेतु का किया निरीक्षण

कार्य की धीमी प्रगति पर व्यक्त की नाराजगी, समय से पूरा करने का निर्देश मीरजापुर – जिलाधिकारी श्री प्रवीण कुमार लक्षकार के निर्देश के क्रम में कल दिनांक 20 मई…

अपर पुलिस महानिदेशक महोदय द्वारा दिए गए आवश्यक दिशा निर्देश “पुलिस लाइन सभागार बिजनौर”:

बिजनौर-आज दिनांक 21.05.2022 को श्रीमान अपर पुलिस महानिदेशक राजकुमार द्वारा पुलिस लाइन सभागार में जनपद के सभी पुलिस के राजपत्रित अधिकारी व जनपद के सभी थाना प्रभारियों के साथ अपराध…

DSP तंजील अहमद हत्याकांड में दोषी मुनीर और रेयान को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा बिजनौर:

बिजनौर-में NIA के DSP तंजील अहमद हत्याकांड में दोषी मुनीर और रेयान को कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी है। 2016 में पुरानी रंजिश में तंजील व उनकी पत्नी…

आतंकवाद निरोध एवं राष्ट्रवाद विषय पर राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा सेमिनार का आयोजन

राजकीय महाविद्यालय आवास विकास बदायूं में आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत आतंकवाद निरोधक दिवस के अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग के द्वारा एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।…

मिशन शक्ति फेज 4.0 के अन्तर्गत महिला कल्याण विभाग-बदायूॅ द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

मिशन शक्ति फेज 4.0 के अन्तर्गत जिलाधिकारी महोदया के निर्देशानुसार जनपद में आज दिनांक 21.05.2022 को राजाराम महिला इण्टर कॉलेज, पार्वती आर्य कन्या संस्कृत इण्टर कॉलेज, राजकीय कन्या इण्टर कॉलेज,…

आतंकवाद निरोधक दिवस पर हुआ विचार गोष्ठी का आयोजन

राजकीय महिला महाविद्यालय बदायूं में आज दिनांक 21/05/ 2022 को राष्ट्रीय सेवा योजना एवं रेंजर्स इकाई के तत्वाधान में मिशन शक्ति तथा आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत आतंकवाद…

नशे की अवस्था मे गाड़ी ना चलाएं: डॉ जायसवाल

आवास विकास स्थित राजकीय महाविद्यालय बदायूं में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत गोष्ठी का आयोजन किया गया।गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में…

आतंकवाद निरोधक दिवस पर पोस्टर प्रतियोगिता व जैव विविधता विषय पर निबंध प्रतियोगिता।

सहसवान : डी पी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में “आजादी का अमृत महोत्सव व मिशन शक्ति अभियान “के तहत विषय -“आतंकवाद विरोध एवं राष्ट्र वाद” पर पोस्टर प्रतियोगिता व “जैव विविधता या…

तेज रफ़्तार रोडवेज से ई रिक्शा की टक्कर हुई

आसिफ रईस की रिपोर्ट बिजनौर-तेज़ रफ़्तार रोडवेज बस ने ई-रिक्शा में मारी टक्कर।ई-रिक्शा में सवार तीन लोग हुए गम्भीर रूप से जख्मी।तीनो की हालत नाजुक ज़िला अस्पताल में भर्ती।टक्कर के…

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!