फरधान खीरी। जनपद के पीरपुर गांव में बुधवार को जश्ने ईद मिलादुन्नबी का पर्व बड़े ही धूमधाम, अकीदत और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गांव में एक भव्य जुलूस निकाला गया, जो सुबह करीब नौ बजे मस्जिद से शुरू होकर पीरपुर ईदगाह पहुंचा और गांव में भ्रमण करते हुए करीब ग्यारह बजे मस्जिद के पास पहुंचकर समाप्त हुआ।


जुलूस के दौरान लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। रास्ते में श्रद्धालुओं के लिए केले, बिस्कुट, लंगर और पानी की बेहतरीन व्यवस्था की गई थी, जिससे पूरे कार्यक्रम में आपसी भाईचारे और सौहार्द का माहौल बना रहा। हालांकि, इस दौरान मुख्य मार्गों पर सफाई व्यवस्था और सड़कों पर चूना न डाले जाने को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली।


कार्यक्रम में मौलाना महबूब रजा और मोहम्मद सबील रजा ने नाते कलाम पेश किया। उन्होंने पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 570 ईस्वी में इस्लामिक महीने रबी-उल-अव्वल की 12 तारीख को मक्का में हुआ था। उनके पिता अब्दुल्ला का साया उनके जन्म से पहले और माता अमीना का साया उनके 6 वर्ष की उम्र में ही उठ गया था। इसके बाद उनका पालन-पोषण दादा अब्दुल मुत्तलिब और चाचा अबू तालिब ने किया।
मक्का के लोग उनकी ईमानदारी और सच्चाई के कारण उन्हें ‘अल-अमीन’ (भरोसेमंद) और ‘अल-सादिक’ (सच्चा) कहकर पुकारते थे। 25 वर्ष की आयु में उनका विवाह हजरत खदीजा से हुआ, जो इस्लाम स्वीकार करने वाली दुनिया की पहली महिला थीं। 8 जून 632 ईस्वी को 63 वर्ष की आयु में मदीना में उनकी वफात हुई और उन्हें मस्जिद-ए-नबवी में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। मौलानाओं ने सभी से आपसी प्रेम और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष मुस्ताक अली, सदर मुस्तकीम अली, पत्रकार शाबान सिद्दीकी, जाहिद अली, तालिब अली, अजीज अहमद, अली अहमद, जुबारिल अली, रहीश अली, अमीन हुसैन, हनीफ इदरीशी, शकील और मोहय्यद्दीन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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