
बरेली मे गणेश चतुर्थी को देखते हुए इस बार उर्स में चादरों के जुलूस नहीं निकाले गए। दरगाह इंतजामिया ने जायरीन से प्रशासन की अपील मानने और जुलूस के रूप में चादर न लाने को कहा था। इसके बाद जायरीन निजी वाहनों से खानकाह पहुंचे और परिसर में चादर खोलकर मजार-ए-पाक पर चढ़ाई। इंतजामिया ने इसे शहर में भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने में सहयोग बताया। महाराष्ट्र और गुजरात से करीब 700 जायरीन का सकलैनी कारवां मंगलवार दोपहर लोकमान्य तिलक-दादर एक्सप्रेस से बरेली जंक्शन पहुंचा। जायरीन हनीफ वडाला सकलैनी, फैसल बकरानी, सादिक मुछाडा, एहसन सईद, अफजल सकलैनी, नौशाद सकलैनी, जाफर सकलैनी, डॉ. इमरान सकलैनी, उवैस सकलैनी और सूफियान सकलैनी के नेतृत्व में आए थे। सफर के दौरान जायरीन दुरूद शरीफ, तस्बीह और जिक्र-ए-इलाही करते रहे। कारवां के साथ मेडिकल सुविधा भी थी।
बरेली जंक्शन पहुंचने पर मुहिब्बाने गाजी-ओ-सकलैनी फाउंडेशन ने कैंप लगाकर कारवां का स्वागत किया। आमिर सकलैनी, मोहसिन आलम, शाबेज सकलैनी, राशिद सकलैनी, मुशाहिद सकलैनी, खुर्रम सकलैनी, सय्यद राशिद, फैसल सकलैनी, राजा सकलैनी, डॉ. समीर, फेमी सकलैनी, अब्बास सकलैनी, जमील सकलैनी और आरिफ सकलैनी ने व्यवस्था में मदद की।
रिपोर्टर गौरव सक्सेना एम डी न्यूज़ बरेली।
