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रिपोर्ट जुबैर अहमद करेली थाना पत्रकारिता प्रभारी प्रयागराज
प्रयागराज:-फूलपुर थाना क्षेत्र में एक अधिवक्ता के घर में कथित रूप से प्रवेश, घर में मिले मांस की जांच के बाद हुई पुलिस कार्रवाई तथा थाना परिसर का कथित आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के मामले में इलाहाबाद जनकल्याण समिति ने निष्पक्ष जांच और विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है|समिति के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता मोहम्मद हन्जला के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी प्रयागराज के माध्यम से ज्ञापन सौंपने की तैयारी की गई है|ज्ञापन में कहा गया है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिवक्ता के घर में कथित रूप से 10–15 लोगों के पहुंचने के बाद वहां मौजूद मांस की पुलिस एवं पशु चिकित्सक के माध्यम से जांच कराई गई|समिति का कहना है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार पशु चिकित्सक की जांच में मांस गाय का न होकर भैंस का बताया गया|ज्ञापन में आगे कहा गया है कि इसके बावजूद संबंधित अधिवक्ता के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने की बात सामने आई है|इसके बाद अधिवक्ता की गिरफ्तारी के विरोध में कुछ लोग फूलपुर थाने पहुंचे| इसी दौरान थाना परिसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कथित रूप से मुस्लिम समुदाय और मस्जिद के संबंध में आपत्तिजनक एवं अभद्र भाषा का प्रयोग किए जाने का दावा किया जा रहा है|अधिवक्ता मोहम्मद हन्जला फारूकी अध्यक्ष इलहाबाद जन कल्याण समिति ने कहा कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का विरोध लोकतांत्रिक तरीके से किया जा सकता है,लेकिन यदि वायरल वीडियो में किसी समुदाय या धार्मिक स्थल के विरुद्ध कानून का उल्लंघन करने वाली भाषा का प्रयोग प्रमाणित होता है तो उसकी निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए|ज्ञापन में मांग की गई है कि वायरल वीडियो की मूल रिकॉर्डिंग,थाना परिसर की सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित कर तकनीकी जांच कराई जाए|जांच में जिन व्यक्तियों की भूमिका प्रमाणित हो, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए|समिति ने यह भी मांग की है कि थाना परिसर में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के दौरान कथित आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कैसे हुआ और उस समय पुलिस द्वारा क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी जांच कराई जाए|मोहम्मद हन्जला ने कहा कि समिति किसी निर्दोष व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की मांग नहीं कर रही है, बल्कि मांग केवल इतनी है कि वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जिसकी भूमिका प्रमाणित हो, उसके विरुद्ध निष्पक्ष एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाए| उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय अथवा धार्मिक स्थल के संबंध में आपत्तिजनक भाषा के मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

