रिपोर्ट आकाश मिश्र
कस्ता (खीरी), 28 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद के मितौली विकास क्षेत्र में प्रवाहित हो रही सरायन नदी ने एक बार पुनः तबाही मचा रखी है। आपको बता दें कि विगत तीन दिवसीय भारी आंधी- तूफान एवं बारिश के चलते हर जगह त्राहि मची हुई है। नदियां एक बार पुनः उफनाई हुई हैं। वहीं गोला से निकली सरायन नदी ने तराई क्षेत्र में भारी तबाही मचा रखी है।

कस्ता क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम दानपुर सहित कई अन्य गाँवों में घरों के अंदर सरायन नदी के जल ने प्रवेश किया है। जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। खेतों में फसलें पूरी तरह से जलमग्न हो गई हैं। जिससे किसानों को फसलों के डूबने का डर सता रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी तबाही सन 2007 में मची थी उसके पश्चात इस बार फिर वही मंजर देखने को मिला है। किसानों को यह चिंता सता रही है कि उनकी साल भर की पूंजी खेतों में तैयार है, जिसमें नदी की धार चल रही है। लोगों को डर है कि यदि फसलें जल में डूब गईं और नुकसान हो गया तो परिवार का पालन पोषण कैसे होगा? एक ओर जहां जिम्मेदारों द्वारा विभिन्न प्रकार के लंबे चौड़े वादे किए जाते हैं, वहीं दूसरी और जमीनी स्तर पर परिणाम शून्य मिलता है।
किसानों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि जिस प्रकार से बरसात के दिनों में शारदा सहायक पोषक नहर का जल सरायन नदी में छोड़ दिया जाता है यदि इसी जल को फसली सीजन के समय अर्थात अप्रैल मई में नदी में छोड़ दिया जाए तो सिंचाई में कुछ राहत मिल जाए किंतु ऐसा नहीं किया जाता है। उस समय जल को रोक दिया जाता है परिणामस्वरूप किसान अपनी फसल को किसी तरह से सींच करके तैयार कर पाता है और जब फसल तैयार हो जाती है तब बरसात के दिनों में बाढ़ तो आती ही है ऊपर से उसमें नहर का पानी भी छोड़ दिया जाता है और फसलों का नुकसान हो जाता है। किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद कोई आए और गांव में हमारी फसलों और घरों का सर्वे करें तो हो सकता है कि जख्मों पर कुछ मलहम लग जाए। किंतु दुख की बात यह है कि किसानों के आंसू पोंछने वाला कोई नहीं, बस केवल लंबे चौड़े वादे ही मिलते हैं।
