
कांग्रेस ने आराधना मिश्रा को उत्तर प्रदेश संगठन का कमान देकर वंचित समाज के सपनों पर किया कुठाराघात! अशोक विश्वकर्मा
लखनऊ/वाराणसी:* उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बहुजनों, दलितों, पिछड़ों और वंचित समाज की बात तो करती है, लेकिन जब भागीदारी देने की बारी आती है तो वही पुराने सामंती चेहरों को आगे कर देती है।
कांग्रेस हाईकमान द्वारा आराधना मिश्रा मोना को उत्तर प्रदेश संगठन की कमान सौंपे जाने के फैसले ने प्रदेश के करोड़ों बहुजन कार्यकर्ताओं और वंचित समाज के लोगों में गहरी निराशा पैदा कर दी है।
बहुजनों में आक्रोश, पूछ रहे हैं – हमारा नेतृत्व कहाँ है?
प्रदेश भर के विश्वकर्मा समाज, दलित, पिछड़ा वर्ग, और अतिपिछड़े समाज के लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कांग्रेस में वंचित समाज का कोई नेता संगठन चलाने लायक क्यों नहीं समझा गया?
जिस उत्तर प्रदेश में 85% आबादी बहुजन और वंचित समाज की है, वहां संगठन की बागडोर फिर से एक ही परिवार और एक ही वर्ग के हाथ में देना, सामाजिक न्याय की हत्या नहीं तो और क्या है?
कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं का कहना है – राहुल गांधी जी भारत जोड़ो यात्रा में बहुजनों की बात करते हैं, सामाजिक न्याय की बात करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में आते ही फैसला वही पुराना – वंचितों को सिर्फ झंडा उठाने के लिए रखो और कुर्सी सवर्ण परिवारों को दो।
विश्वकर्मा समाज और शिल्पकार समाज में भारी नाराजगी
ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा सहित तमाम बहुजन संगठनों में इस फैसले को लेकर भारी रोष है। लोगों का कहना है कि कांग्रेस अगर सच में वंचित समाज को साथ लेकर चलना चाहती है तो उसे संगठन में हिस्सेदारी देनी होगी, सिर्फ सहानुभूति के दो शब्दों से काम नहीं चलेगा।
आज बहुजन समाज जागरूक है। वह पूछ रहा है कि क्या कांग्रेस ने आराधना मिश्रा को कमान देकर यह संदेश दे दिया है कि उत्तर प्रदेश में बहुजनों का कोई भविष्य कांग्रेस में नहीं है?
यह फैसला कांग्रेस को 2027 से पहले ही बहुजन समाज से बहुत दूर कर देगा।
