बदायूँ : जिलाधिकारी दीपा रंजन ने मुख्य विकास अधिकारी ऋषिराज के साथ कलेक्ट्रेट स्थित सभाकक्ष में “जल जीवन मिशन कार्यक्रम की बैठक आयोजित की। डीएम ने कार्य की गति धीमी पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यदायी संस्था के अभियन्ताओं को कड़े निर्देश दिए कि मैनपावर बढ़ाकर कार्य में गति लाई जाए। उन्होने निर्देश दिए कि जो भी समस्याएं आ रही हो उन्हे प्राथामिकता से दूर की जाए।
अधिशासी अभियन्ता जल निगम ने अवगत कराया कि जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में “जल जीवन मिशन कार्यक्रम के अन्तर्गत नयी पाइप पेयजल योजनाओं के निर्माण हेतु राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, लखनऊ द्वारा चयनित फर्म मै० पी०एन०सी०एस०पी०एम० एल० ज्वाइंट वैनचर, आगरा को जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, द्वारा प्रथम चरण अन्तर्गत 346 ग्राम पंचायतों के 501 राजस्व ग्रामों की सूची आवश्यक कार्यवाही हेतु उपलब्ध करायी गयी थी।

जिला प्रशासन द्वारा फर्म को वर्तमान में 346 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 340 ग्राम पंचायतों में भूमि की सूची उपलब्ध करा दी गई है। फर्म द्वारा वर्तमान तक 307 ग्राम पंचायतों के 442 राजस्व ग्रामों की पाइप पेयजल योजनाओं की डी०पी०आर० प्रस्तुत की गयी थीं, जिनमें से 307 डी०पी०आर० को जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, द्वारा अनुमोदन उपरान्त आवश्यक कार्यवाही हेतु राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, लखनऊ को प्रेषित किया जा चुका है। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, लखनऊ को प्रेषित पेयजल योजनाओं की डी०पी०आर० के सापेक्ष राज्य स्तरीय योजना स्वीकृति समिति द्वारा जनपद की 251 नग ग्राम पंचायतों की पाइप पेयजल योजनाओं की डी०पी०आर० को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गयी हैं, जिसके सापेक्ष 199 नग योजनाओं के कवर एग्रीमेन्ट राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, लखनऊ के स्तर से गठित किये जा चुके 157 है। वर्तमान तक फर्म द्वारा नग स्थल पर कार्य प्रारम्भ करा दिया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में “जल जीवन मिशन“ कार्यक्रम के अन्तर्गत नयी पाइप पेयजल योजनाओं के निर्माण हेतु राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन लखनऊ द्वारा चयनित फर्म मै० पी०एन०सी०एस०पी०एम०एल० ज्वाइंट वैनचर, आगरा को जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, बदायूँ द्वारा द्वितीय चरण अन्तर्गत 664 ग्राम पंचायतों के 943 राजस्व ग्रामों की सूची आवश्यक कार्यवाही हेतु उपलब्ध करायी गयी है। फर्म द्वारा भूमि चिन्हांकन का कार्य प्रगति पर है। वर्तमान तक 510 ग्राम पंचायतों में फर्म को भूमि उपलब्ध करायी जा चुकी है। फर्म द्वारा 102 नग डी०पी०आर० कार्यालय में प्रस्तुत की गयी है। जिनको परीक्षण उपरान्त खण्ड कार्यालयों द्वारा उच्चाधिकारियों को अग्रेत्तर कार्यवाही हेतु प्रेषित किया जा चुका है। 48 नग डी०पी०आर० की सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने के उपरान्त राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, लखनऊ को प्रेषित की जा चुकी है।

✍️ ब्यूरो रिपोर्ट आलोक मालपाणी (बरेली मंडल) 9058426315

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!