चन्द्र दर्शन के अनुसार 03 मई 2022 को ईद-उल-फितर का त्यौहार मनाया जायेगा। शासन के निर्देशानुसार कोविड-19 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाये। ईद-उल-फितर के अवसर पर कानून एवं शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के उददेश्य से जिला मजिस्ट्रेट दीपा रंजन ने मजिस्ट्रेट नामित किए हैं।

प्रवर्धन शर्मा अतिरिक्त मजिस्ट्रेट प्रथम को थाना कोतवाली बदायूँ, उप निदेशक कृषि प्रसार को सिविल लाइन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को पुलिस चौकी सोथा, अधिशासी अभियन्ता बाढ़ खण्ड को जामा मस्जिद बदायूँ, जिला समाज कल्याण अधिकारी को चौराहा जालन्धरी सराय,  बंदोवस्त अधिकारी चकबन्दी को पुलिस चौकी नई सराय, पी०डी० डी०आर०डी०ए० को छः सडका, जिला विकास अधिकारी को नवादा चौकी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पुलिस चौकी लालपुल, जिला विद्यालय निरीक्षक को मीरा जी की चौकी, आशीष सक्सेना ना०तह० सदर बदायूँ को थाना उझानी, रविन्द्र प्रताप सिंह को थाना कुंवरगांव, संयुक्त खण्ड विकास अधिकारी को थाना कादरचौक, खण्ड विकास अधिकारी सालारपुर को थाना बिनावर, खण्ड विकास अधिकारी दातागंज को थाना मूसाझाग, तहसीलदार सहसवान को कोतवाली सहसवान, खण्ड विकास अधिकारी उझानी को थाना मुजरिया, खण्ड विकास अधिकारी सहसवान को थाना जरीफनगर, जिला एवं अर्थ संख्याधिकारी को थाना उघैती, तहसीलदार बिसौली को कोतवाली बिसौली, नायब तहसीलदार बिल्सी को थाना बिल्सी, तहसीलदार दातागंज को कोतवाली दातागंज, खण्ड विकास अधिकारी उसावां को थाना उसावां, अमर सिंह अधि0 अभि०प्रा०लो०नि०वि० को थाना अलापुर, नायब तहसीलदार दातागंज को थाना हजरतपुर, खण्ड विकास अधिकारी म्याऊँ को थाना उसहैत,तहसीलदार बदायूँ को पुलिस चौकी ककराला, नायब तहसीलदार बिसौली को थाना फैजगंज बेहटा, तहसीलदार बिल्सी को थाना इस्लामनगर में मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात किया है। इनके अलावा खण्ड विकास अधिकारी आसफपुर, अधिशासी अभियन्ता नलकूप खण्ड प्रथम, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, जिला कार्यक्रम अधिकारी, अधिशासी अभियन्ता निर्माण खण्ड लो०नि०वि० को आरक्षित रखा गया है।

नगर मजिस्ट्रेट व समस्त उप जिला मजिस्ट्रेट संवेदनशील स्थानों पर अधिकारियों/ कर्मचारियों की तैनाती अपने स्तर से कर सकते हैं, जिसकी सूचना तत्काल नाम/ मोबाइल नम्बर सहित अधोहस्ताक्षरी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बदायूँ को उपलब्ध कराई जाये। इसके अतिरिक्त ईद-उल-फितर पर कानून एवं शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के उद्देश्य से निर्देशों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। ईदगाहों एवं मस्जिदों में शासन की गाइड लाइन्स के अनुसार ही जानकारी प्राप्त कर स्थल की संवेदनशीलता का आंकलन करने के उपरान्त नमाज के समय सुरक्षा के कड़े प्रबन्ध किये जायें तथा यह सुनिश्चित किया जाये कि कोई आवारा पशु मस्जिद एवं ईदगाह क्षेत्र में अथवा उसके पास न घूमने पाये, त्यौहार के दष्टिगत जानकारी भी पहले से कर ली जाये तथा उन क्षेत्रों का भ्रमण कर यह सुनिश्चित किया जाये कि कोई नई परम्परा न पड़ने पाये, क्षेत्र में उपद्रवी/असामाजिक तत्वों, अपराधियों तथा आपराधिक चरित्र के व्यक्तियों की पहचान करके उनकी गतिविधियों पर करीबी दृष्टि रखी जाये तथा आवश्यकतानुसार निरोधात्मक कार्यवाही करके यह सुनिश्चित किया जाये कि कोई अप्रिय घटना घटित न हो। सभी उत्तरदायी मजिस्ट्रेट घटनाओं की सूचना जिला मजिस्ट्रेट तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बदायूँ को तीव्रतम सन्देश माध्यम से उपलब्ध कराये। जनपद में धारा 144 दण्ड प्रक्रिया संहिता प्रभावी है। शासन के निर्देशानुसार पर्व पर शोभायात्रा/जुलूस आदि बिना अनुमति के नहीं निकाला जायेगा। सोशल मीडिया पर कोई आपत्तिजनक पोस्ट या वीडियो नहीं डाली जायेगी यदि ऐसा कोई व्यक्ति करता है तो सम्बन्धित व्यक्ति के विरूद्ध कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। छोटी समस्याओं को गम्भीरता से देखा जाये तथा उनका तत्काल निराकरण कराया जाये। अपर जिला मजिस्ट्रेट प्रशासन अपर पुलिस अधीक्षक नगर बदायूँ के साथ तथा अपने अपर जिला मजिस्ट्रेट वित्त एवं राजस्व अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के साथ भ्रमणशील रहकर शान्ति व्यवस्था सुनिश्चित करायेगे। नगर में मजिस्ट्रेट तथा सम्बन्धित उप जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस क्षेत्राधिकारी अपने उच्चाधिकारियों के सम्पर्क में रहकर अपने-अपने क्षेत्रान्तर्गत त्यौहार को शान्ति पूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने हेतु उत्तरदायी होंगे। सभी तहसीलों तथा नगर क्षेत्र में उत्तरदायी अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना घटित न होने पाये तथा त्यौहार परम्परागत तरीके से शान्तिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हो।

✍️ ब्यूरो रिपोर्ट आलोक मालपाणी बदायूं

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!