अक महोत्सव -साहित्य एवं चरित्र में विभूतियों को मिलेगा करेक्टर-ट्री सम्मान।

रोहित सेठ

21 अगस्त को कैरेक्टर-ट्री से सम्मानित होगे कुमार सानु, बोनी कपूर कैरेक्टर-ट्री सम्मान से सम्मानित होगी कई विभूतिया।

वाराणसी 10 अगस्त, वर्तमान समाज सुविधाओं विकास के साथ साथ भ्राचार और अनाचार का घोर शिकता जा रहा है. जिसका एकमार निठान है सदचरित्र का निर्माणः। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यह कार्यक्रम अक महोत्सव साहित्य एव चरित्र नाथ में 21 अगस्त को बादल सूत्रों में आयोजित से गए है जिसके अनर्गत देश दुनिया में चरित्र निर्माण की अलख जगाने वाला केरेक्टर-ट्री सम्मान हर वर्ष की धानि इस वर्ष भी प्रदान किया जाएगा। इस वर्ष जिन विभूतियों को इस सम्मान में काशी की भूमि पर सम्मानित किया जाएगा उनके नाम और क्षेत्र इस प्रकार है

  1. पद्यम श्री कभार सानू (सुविख्यात गायक कलाकार) क्षेत्र: गायन
  2. बोनी कपूर (विख्यात फिल्म निर्माता) क्षेत्र: चित्रपट कला
  3. ओम निश्चल (गीतकार, कवि एवं समीक्षक क्षेत्र साहित्य
  4. सकेत उपाध्याय (मुविख्यात पत्रकार) क्षेत्र पत्रकारिता
  5. आई टी एम विग्रविद्यालय (ग्वालियर एवं बड़ौदा क्षेत्र शिक्षा
  6. आरुषि निशक (फिल्म निर्माता, अभिनेत्री एवं कथक कलाकार) क्षेत्र नारी शक्ति
  7. तषा है नियोगी (निर्देशिका, नियोगी बक्स) क्षेत्र: प्रकाशन
  8. प्रमोद खानविलकर (व्यवसाय) क्षेत्र व्यवसाय

२. राहील राजा। फैशन स्टाइलिस्ट क्षेत्र फैशन

  1. मौना सिह (समाज सेवी क्षेत्र ममाजसेवा
  2. आशीष गुमा (शिक्षक) क्षेत्र अक महयोगी
  3. अमित श्रीवास्तव (व्यवसाय) क्षेत्र: अक सहयोगी

साथ ही साथ कार्यक्रम में साहित्य और चरित्र विषय पर स्वामी ओमा द अक द्वारा विशेष वक्तव्य होगा। कार्यक्रम में सावला लडका नाम में एक म्यूजिक विडिओं का अनावरण भी होगा (उक्त जानकारी आज अक् सस्था के व्यवस्थापक हितेश अक द्वारा आयोजित होटल फोर लीफ ब्लू सेफाअर में एक प्रेस कानफ्रेम के दोरान बताई गई। प्रेस कान्फ्रेंस में मुख्य रूप से आनंद सिंह और साकीब भारत सम्मिलित हुए।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!