फेयर में छात्रों को 10 व 12 के बाद कैरियर की राह दिखायेंगे विशेषज्ञ* 19 नवम्बर को आयोजित होगा कैरियर काउंसलिंग फेयर।* अलग-अलग कोर्स के 15 से अधिक लगेंगे स्टॉल, छात्र-छात्राओं को दी जायेगी जानकारी।

सूरज गुप्ता

सिद्धार्थनगर।

केन्द्रीय विद्यालय में 19 नवम्बर आयोजित होने वाले कैरियर काउंसलिंग फेयर में करीब 1000 छात्र-छात्राओं को कैरियर की राह दिखायी जायेंगी। भारत के बड़े शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञ कक्षा 10 व 12 वीं के छात्र-छात्राओं को बतायेंगे कि उन्हें किस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए क्या करना चाहिए? इसमें प्रमुख विषयों का स्टॉल भी लगायें जायेंगे, जहां छात्र सम्बन्धित विषय के बारें में बेहतर जानकारी प्राप्त कर पायेंगे। ये बातें जिला विद्यालय निरीक्षक सोमारू प्रधान ने कहीं। वह मंगलवार को शहर के विद्या मन्दिर में प्रधानाचार्यो की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। बताया कि शहर में पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय में सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ कई आईएएस एवं आईपीएस भी टिप्स देंगे छात्र-छात्राएं अलग अलग क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहत हैं, लेकिन सभी छात्र-छात्राओं को शुरूआती दौर में सही जानकारी नहीं मिल पाती है। कैरियर फेयर में पेशेवर शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की जानकारी दी जायेगी। डीआईओएस सोमारू प्रधान ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। विशेषज्ञों के नाम तय हो गयें हैं, जिले में पहली बार ऐसा आयोजन हो रहा है। इसमें शामिल छात्र-छात्राओं का ज्ञानार्जन होगा।उन्होंने बताया कि आईएएस, आईपीएस के साथ नीट एवं कानून सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की जायेगी। 10 वीं के बाद छात्रों को डिप्लोमा, एलआईसी, अग्निवीर जनरल ड्यूटी, फाइन आर्ट, आईटीआई, पीएमकेवाई, डिप्लोमा डांस म्यूजिक, डिप्लोमा बिल्डिंग सुपरवाइजर, डिप्लोमा फार्म मैनेज मैंट सहित डिप्लोमा के विभिन्न कोर्स को करके स्वरोजगार पा सकेंगे। जबकि 12 वीं की पढ़ाई करने के बाद छात्र वाणिज्य वर्ग में सीए, सीएसईईटी, बीबीए, बीकॉम, बीसीए डीएड की पढ़ाई कर सकते है। विज्ञान वर्ग से बीएस डब्लू, एलएलबी इन्टीग्रेटड, बीए, बीबीए, फारेन लैंग्बैंज डिप्लोमा, बीएससी की पढ़ाई करके आगे भी कैरियर बना सकते है। 12 वीं में कला विज्ञान व वाणिज्य वर्ग से डिप्लोमा ट्रैवल्स और टूरिज्म, डीएमएलटी, डिप्लोमा इन एजुकेशन, डिप्लोमा एयर होस्टेस, फ्लाइट अटैंडेंट, इम्पोर्ट एस्पोर्ट, होटल मैनेजमैंट डिप्लोमा सहित कई क्षेत्रों में रोजगार का अवसर है। बैठक में जीआईसी नौगढ़ के प्रधानाचार्य दयाशंकर यादव सहित बड़ी संख्या में प्रिंसिपल मौजूद थे।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!