डीएम की अध्यक्षता व सीडीओ की उपस्थिति में मुख्यमंत्री डैश बोर्ड की हुई समीक्षा बैठक

सूरज गुप्ता

सिद्धार्थनगर।

जिलाधिकारी डा0 राजागणपति आर0 की अध्यक्षता एवं मुख्य विकास अधिकारी जयेन्द्र कुमार की उपस्थिति में मुख्यमंत्री डैश बोर्ड (विकास कार्यों) की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुआ। जिलाधिकारी ने बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान एमडीएम की फीडिंग कम पायी गयी, जिसपर कड़ी नाराजगी व्यक्त की गयीं तथा जिलाधिकारी ने एमडीएम की फीडिंग का प्रतिशत बढ़ाने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिया कि जो भी पंचायत भवन का निर्माण हो रहा है, उसे मानक अनुसार गुणवत्तापूर्ण एवं समय से पूर्ण करायें। जिन ग्रामों में पंचायत भवन निर्माण हेतु धनराशि प्रेषित की गयी है, उन ग्रामों में पंचायत भवन का निर्माण कराना सुनिश्चित करें। इसके साथ ही टाइल्स, फर्नीचर व अन्य सभी कार्य कराना सुनिश्चित करें। विद्युत विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देश दिया कि शासन द्वारा निर्धारित समयान्तर्गत ट्रान्सफार्मर बदलवाना सुनिश्चित करें। कोई भी ट्रान्सफार्मर खुले में न रहें। ट्रान्सफार्मर ढकने के लिए प्रस्ताव बनाकर प्रेषित करें। शेड्यूल अनुसार विद्युत आपूर्ति करने का निर्देश दिया। माध्यमिक विद्यालय के भवन निर्माण की समीक्षा की गयी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया कि एम्बुलेंस समय से लाभार्थी तक पहुंचें। इसके साथ ही आवश्यक उपकरण एम्बुलेंस में होना चाहिए। लाभार्थियों का फीडिंग समय से पूर्ण कराये तथा अनुदान समय से प्रेषित कराने का निर्देश दिया। जल जीवन मिशन के अन्तर्गत कराये जा रहे कार्यों एवं कनेक्शन का कार्य की प्रगति कम पाये जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की गयी। फैमिली आई0डी0 बनवाने हेतु सम्बन्धित को निर्देश दिया गया। कृषि रक्षा रसायन का अनुदान डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खाते में प्रेषित करने का निर्देश दिया। बार्डर पर बन रहे गेट के निर्माण की प्रगति धीमी पाये जाने तथा सड़कों के गड्ढा मुक्त कराये जाने की प्रगति कम पाये जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिशासी अभियन्ता लोक निर्माण विभाग का स्पष्टीकरण प्राप्त करने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिया कि माह दिसम्बर 2024 में सामूहिक विवाह योजना के लक्ष्य के सापेक्ष सामूहिक विवाह कराना सुनिश्चित सकें। इसके अलावा मुख्यमंत्री डैश बोर्ड (विकास कार्यों) की समीक्षा में पंडित दीन दयाल उपाध्याय सोलर लाइट योजना, सोलर स्ट्रीट लाइट बीकेएस ग्राम उन्नति योजना, विद्युत विभाग द्वारा खराब ट्रांसफार्मर को बदलने में, कृषि रक्षा रसायन डी0बी0टी0, एम्बूलेंस सेवा(102), टेली रेडियोलाजी, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम, मोबाइल मेडिकल यूनिट, दिव्यांग पेंशन आधार सीडिंग, सामाजिक वनीकरण, पशु टीकाकरण, पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, निराश्रित महिला पेंशन, कन्या विवाह सहायता योजना, राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, वृद्धावस्था पेंशन आदि की समीक्षा की। इसके अलावा अन्य विभागों में संचालित अन्य योजनाओं/परियोजनाओं में शासन के मंशा के अनुरूप कार्यों में प्रगति लाकर शत प्रतिशत लक्ष्य को पूर्ण करें। जिलाधिकारी द्वारा नेडा विभाग, उद्यान, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी योजना, ग्रामीण अभियन्त्रण विभाग, जल निगम, पंचायती राज, पर्यटन, वन विभाग, प्राथमिक शिक्षा, पशुधन, मत्स्य, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण विभाग (सामूहिक विवाह), फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि, लोक निर्माण, श्रम एवं सेवायोजन, आदि विभागों के कार्यों की समीक्षा की गयी। इस बैठक में उपरोक्त के अतिरिक्त अधीक्षण अभियन्ता विद्युत अजय कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक सोमारू प्रधान, उपकृषि निदेशक अरविन्द कुमार विश्वकर्मा, जिला पर्यटन सूचना अधिकारी प्रिया सिंह, जिला उद्यान अधिकारी नन्हे लाल वर्मा व अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थेे।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!