• ज्ञापन के दौरान पत्रकारों ने हत्यारों को फांसी दो, पत्रकार एकता जिंदाबाद एवं सीतापुर तहसील प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए

लखीमपुर खीरी। पड़ोसी जिला सीतापुर के इमलिया सुल्तानपुर थाना क्षेत्र में बदमाशों की गोलियों के शिकार हुए पत्रकार राघवेंद्र बाजपेई की हत्या से आक्रोश प्रदेश के पत्रकारों में लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी के चलते हैं क्रांतिकारी पत्रकार परिषद लखीमपुर खीरी के पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौपा। इस दौरान पत्रकारों ने पत्रकार एकता जिंदाबाद, क्रांतिकारी पत्रकार परिषद जिंदाबाद केंद्रीय प्रमुख अनिल दूबे आजाद जिंदाबाद हत्यारों को फांसी दो,आवाज दो हम एक हैं, सीतापुर तहसील प्रशासन मुर्दाबाद के जमकर नारे लगाए। ज्ञापन में घटना की सीबीआई जांच हो, पत्रकार के हत्यारों को फांसी देने, परिवार को आर्थिक सहायता के रूप में एक करोड़ मुआवजा, बच्चों को निशुल्क शिक्षा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग किया।

इसके अलावा पत्रकारों के साथ अन्याय हो रही हत्याएं आए दिन हो रहे हमलों को लेकर सरकार पत्रकारों के मीडिया आयोग का गठन करें एवं पत्रकारों की सुरक्षा हेतु सख्त कानून बनाए। इसके साथ ही क्रांतिकारी पत्रकार परिषद के जिला अध्यक्ष मो इरफान अंसारी ने प्रशासन को चेताया कि अगर 48 घंटे के अंदर हमारी मांगों का संज्ञान नहीं लिया गया तो हम सब पत्रकार साथी आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। मुख्यमंत्री महोदय आप देख सकते हैं कि किस तरह लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ को कुचला जा रहा है। इसलिए पत्रकारों की सुरक्षा के लिए आपको तत्काल एक्शन लेना होगा। सीतापुर जिले की जघन्य घटना की क्रांतिकारी पत्रकार परिषद लखीमपुर घोर निंदा करता है और मांग करता है कि उत्तर प्रदेश सरकार से दिवंगत पत्रकार के परिजनों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता की धनराशि दी जाए। बताते चलें बीते दिनों सीतापुर जिले में हाईवे पर एक पत्रकार की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

यह घटना न केवल पत्रकारिता जगत के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। पत्रकार समाज का आईना होते हैं, जो हर वर्ग, चाहे वह राजनीतिक हो या गैरराजनीतिक गरीब हो या अमीर हो, दबे कुचले लोगों की आवाज को बुलंद करते हैं। उनका काम सत्य को सामने लाना और न्याय के लिए संघर्ष करना होता है। लेकिन आज जब एक पत्रकार की हत्या होती है, तो केवल पत्रकारिता जगत ही इसका विरोध करता दिखाई देता है, जबकि यह मामला पूरे समाज और सभी वर्गों को एकजुट होकर खड़े होने की मांग करता है। सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आज राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और हर वर्ग के लोगों का कर्तव्य नहीं बनता कि वे इस घटना के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं? क्या यह जरूरी नहीं कि सभी लोग कंधे से कंधा मिलाकर इस लड़ाई को लड़ें और न्याय की मांग करें? पत्रकारिता का उद्देश्य सिर्फ खबरें देना नहीं, बल्कि समाज में न्याय, स्वतंत्रता और समानता की लड़ाई लड़ना भी है। यदि पत्रकारों की आवाज को दबाया जाएगा, तो समाज की आवाज भी दब जाएगी।


इस घटना के बाद यह आवश्यक है कि सभी वर्गों के लोग, चाहे वे राजनीतिक हों या गैर राजनीतिक सामाजिक संगठन हों या आम नागरिक, सभी मिलकर इस मुद्दे पर एक साथ खड़े हों। इसके लिए एक सुंदर लेख लिखकर, जनजागरूकता फैलाकर और न्याय की मांग करके इस लड़ाई को आगे बढ़ाया जा सकता है। पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। हालांकि क्रांतिकारी पत्रकार परिषद राष्ट्रीय प्रमुख माननीय अनिल दूबे आजाद के निर्देश पर पूरे प्रदेश के परिषद से जुड़े पत्रकारों ने जिला और तहसील स्तर पर विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन देने का जो महत्वपूर्ण कार्य किया है यह केवल पत्रकारों की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है। ज्ञापन के दौरान क्रांतिकारी पत्रकार परिषद के जिला अध्यक्ष मो इरफान अंसारी, जिला प्रभारी हरीश पांडे, जिला उपाध्यक्ष कमलजीत सिंह, जिला विधिक सलाहकार अरविंद मिश्रा, जिला सचिव सोनू पटेल, शरीफ अंसारी, कृष्णा अवस्थी, शाबान सिद्दीकी, पंकज शर्मा, रजनीकांत मिश्रा, नीरज यादव, मालती प्रसाद शर्मा आदि समेत जनपद के दर्जनों पत्रकार मौजूद रहे। इसके अलावा क्रांतिकारी पत्रकार परिषद के जिला महासचिव की अगुवाई में गोला तहसील की कार्यकारिणी के पत्रकार साथियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।


इसके साथ ही जनपद लखीमपुर खीरी के गोला, पालिया, मोहम्मदी, आदि तहसीलों में भी अलग-अलग पत्रकार संगठनों ने आक्रोषित होकर घटना की घोर निंदा करते हुए मुख्यमंत्री और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए।

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