बहु आयामी समाचार वाइस ब्यूरो चीफ लखनऊ मंडल मोहम्मद आमिर 29 जुलाई
लखीमपुर खीरी,
भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ने और उसे सहेजने की अद्भुत अभिव्यक्ति, विद्या भारती द्वारा संचालित सनातन धर्म सरस्वती शिशु वाटिका में नागपंचमी पर्व के अवसर पर देखने को मिली। परंपरा और पौराणिकता से ओतप्रोत इस आयोजन में बाल मनों ने संस्कृति के रंगों से सजी एक जीवंत तस्वीर रच दी।कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की संचालिका हीरा सिंह के प्रेरणादायी उद्बोधन से हुआ।

उन्होंने श्रद्धा और सरलता से राजा परीक्षित, जन्मेजय और आस्तिक मुनि की कथा को बालकों के सम्मुख प्रस्तुत किया, जिसमें सर्प यज्ञ की भीषण अग्नि को संत के हस्तक्षेप से शांति मिली। यह प्रसंग उस बोध को जगाता है जिसमें नागों के संरक्षण की बात की जाती है और पंचमी तिथि को सर्प जाति के सम्मान का प्रतीक माना गया।

संयोजिका बहन पूनम सिंह ने ‘गुड़िया पीटने की परंपरा’ की रोचक और शिक्षाप्रद कथा सुनाई, जिसमें एक भोली बहन द्वारा नाग पर किए गए आघात के फलस्वरूप उत्पन्न सर्पदोष से मुक्ति हेतु एक कपड़े की गुड़िया को प्रतीक रूप में पीटने का विधान बताया गया। यह कथा न केवल बच्चों को मंत्रमुग्ध कर गई, बल्कि उन्हें दोष-निर्मूलन, पशु-प्रेम और धार्मिक विधियों के गूढ़ संदेश से भी परिचित करा गई।बच्चों ने रंग-बिरंगी कपड़ों से बनी गुड़िया लेकर इस परंपरा का अनुपालन किया और भाई-बहन के इस सांस्कृतिक संवाद को उल्लास के साथ जीवंत किया। संपूर्ण वातावरण संस्कृति-संवर्धन और परंपरा-प्रेम की गूंज से गुंजायमान हो उठा।

