वैश्य समाज की बेटी को न्याय दिलाने के लिए आगे आये समाजसेवी मनीष चौधरी
मुजफ्फरनगर। वैश्य समाज की एक बेटी को शादी के दूसरे दिन से ही अतिरिक्त दहेज की मांग के लिए ससुराल में पति और अन्य ससुरालियों के द्वारा प्रताड़ित किया जाने लगा। पीड़ित बेटी ने न्याय मांगने के लिए पुलिस का सहारा लिया, लेकिन महिला थाने में इस पीड़ित बेटी पर ही शिकायत वापस लेकर ससुराल वापस लौट जाने का अनैतिक दबाव बनाया गया तो समाजसेवी मनीष चौधरी ने परिजनों के साथ थाने में पहुंचकर बेटी के लिए न्याय की आवाज को बुलंद किया और एसएसपी से मिलकर शिकायत करने की बात कही है।
राष्ट्रीय सामाजिक संस्था के अध्यक्ष मनीष चौधरी मंगलवार को महिला थाने पहुंचे। उन्होंने मीडिया कर्मियों को जानकारी देते हुए बताया कि पटेलनगर निवासी रामलीला कमेटी से जुड़े धार्मिक प्रवृत्ति के वैश्य समाज के जिम्मेदार नागरिक सुरेन्द्र मंगल ने अपनी बेटी दीक्षा मंगल की शादी सहारनपुर राधा गोविंद सत्संग कालोनी निवासी प्रेम कुमार के पुत्र माधव सिंघल के साथ जून माह में की थी। शादी के बाद से लगातार बेटी दीक्षा का उत्पीड़न किया जाने लगा। समाज ने कई बार समझौता कराने का प्रयास किया, लेकिन ससुराल में दीक्षा को बंधक बनाकर पीटा गया, उसका गर्भपात कराने का प्रयास किया गया, सुसाइड केस में फंसाने की धमकी दी गई और जेवर छीनकर घर से निकाला दिया। दीक्षा ने न्याय पाने के लिए पुलिस से शिकायत की तो केस महिला थाने में आ गया। आरोप है कि आज वो बेटी दीक्षा और अन्य परिजनों के साथ केस की सुनवाई के लिए महिला थाने पर पहुंचे और महिला थाने की एसएचओ से पीड़ित बेटी को न्याय दिलाने और सुरक्षा देने के लिए कहा गया तो एसएचओ ने उल्टे अभद्रता की। आरोप है कि महिला थाने में ऐसी प्रताड़ित बेटियों पर ही ससुराल वालों के साथ समझौता करने का दबाव बनाया जाता है, दीक्षा के साथ भी वो ही किया जा रहा है। ऐसे में दीक्षा वहीं पर बेहोश होकर गिर पड़ी और उसको उपचार के लिए भी नहीं भेजा गया।
दीक्षा ने बताया कि वो अपनी ससुराल में वापस नहीं लौटना चाहती है कि क्यों कि सास, ससुर और खुद पति माधव उसका उत्पीड़न करते हैं। पति के बर्थ डे पर मायके से गिफ्ट में सोने का कड़ा लाने का दबाव बनाया गया और एसयूवी कार तथा सोने की चैन की डिमांड की गई। शादी में लगभग 30 लाख रुपए खर्च करने के अलावा पिता सुरेन्द्र मंगल ने घर बसाने के लिए समाज के लोगों के साथ पहुंचकर ससुर को तीन लाख रुपये नगद दिये थे, लेकिन फिर भी ससुराल वालों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ। वो ससुराल में नहीं लौटना चाहती और ससुराल वालों के खिलाफ कार्यवाही चाहती है। मनीष चौधरी ने कहा कि महिला थाना पीड़ित महिलाओं की अंतिम आस होती है, यदि वहीं पर ऐसा मानसिक उत्पीड़न किया जायेगा तो पीड़ित महिलाएं कहां जायेंगी। उन्होंने कहा कि वो जल्द ही इस प्रकरण मेें एसएसपी से मिलकर पीड़ित बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ने का काम करेंगे। इस मौके पर समाज के कई जिम्मेदार लोग उपस्थित रहे




