हर लफ़्ज़ ने महका दी फिज़ाबहु आयामी समाचार एमडी न्यूज़ वॉइस ब्यूरो चीफ लखनऊ मंडल मोहम्मद आमिर 16 अक्टूबर लखीमपुर। लखीमपुर। प्राचीन ऐतिहासिक दशहरा मेला न केवल आस्था और परंपरा का उत्सव है, बल्कि यह संस्कृति, संवेदना और साहित्य का संगम भी बन चुका है। बारहवें दिन की संध्या इसी सांस्कृतिक श्रृंखला की वह मनोहर झलक रही, जब नामचीन शायरों की नज़्मों और ग़ज़लों ने फिज़ा को महका दिया और श्रोताओं ने वाह-वाह के तराने बिखेर दिए।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जब मुख्य अतिथि पूर्व सांसद जफ़र अली नक़वी, पालिकाध्यक्षा डॉ. इरा श्रीवास्तव, अधिशासी अधिकारी संजय कुमार तथा विशिष्ट जनों ने मंच की शोभा बढ़ाई। उद्घाटन सत्र में नगर की हरियाली और स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु पर्यावरण मित्र समूह के संयोजक विशाल सेठ, मीडिया प्रभारी राममोहन गुप्त, प्रबंधन प्रमुख मयूरी नागर, एवं कोर कमेटी सदस्य सुमन श्रीवास्तव, सपना कक्कड़, पूजा सिंह, संजय गुप्ता, मधुलिका त्रिपाठी और रश्मि महेंद्र को नगर पालिका परिषद द्वारा सम्मानित किया गया। हरित प्रयासों में निरंतर सहयोग के लिए समूह ने भी आभार स्वरूप पालिकाध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव एवं ईओ संजय कुमार को सम्मान अर्पित किया। इसी क्रम में समाजसेवा और जनसरोकारों से जुड़े शीमाब अहमद, शकील खां, दीपक खरे, राजू खान और रियाज़ अहमद को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही प्रसिद्ध शायर बख्त बहादुर श्रीवास्तव की बहू प्रेम श्रीवास्तव, जिन्हें उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान के लिए अति विशिष्ट सम्मान से विभूषित किया गया। शायरी की शाम ने जब लय पकड़ी तो मंच एक मद्धम रौशनी में डूबा हुआ गुलाबों की खुशबू सा महसूस हुआ। शब्दों के मोती और भावों की लहरों ने ऐसा समां बांधा कि हर चेहरा सुकून और गर्व से दमक उठा। इस अवसर पर मेलाध्यक्ष कौशल तिवारी, मेलाधिकारी समरा सईद, श्वेता शर्मा, देवाशीष मुखर्जी, अमित सोनी, हरि प्रकाश त्रिपाठी, इं. दुर्गेश वर्मा तथा विकास सहाय सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का स्वागत संबोधन पालिकाध्यक्षा डॉ. इरा श्रीवास्तव ने किया, वहीं अधिशासी अधिकारी संजय कुमार ने आभार व्यक्त करते हुए कहा यह मेला सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। हर ओर साहित्य की सौंधी खुशबू, पर्यावरण चेतना की हरियाली और सम्मान के उजले रंग लखीमपुर का यह दशहरा मेला सचमुच बन गया है संवेदनाओं का संगम और संस्कृति का उत्सव।

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