बाराबंकी: भैया दूज का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है इस दिन बहने अपने भाई का तिलक कर उनके उज्जवल भविष्य के लिए आशीर्वाद देती है पौराणिक कथाओं के अनुसार यमराज अपनी बहन यमुना के निमंत्रण पर उनके घर गए थे यमुना ने भाई का आदर सत्कार किया आरती उतारी तिलक लगाया और भोजन कराया इससे प्रसन्न होकर यमराज ने अपनी बहन यमुना को वरदान दिया कि इस दिन जो बहने अपने भाई का तिलक करेंगी उनके भाइयों की लंबी उम्र होगी और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य की पत्नी संज्ञा के दो संताने थी पुत्र यमराज और पुत्री यमुना संज्ञा सूर्य का तेज सहन न कर पाने के कारण अपनी इच्छा से छाया मूर्ति का निर्माण कर उन्हें अपने पुत्र पुत्री को सौंप कर वहां से चली गई छाया को यम और यमुना से अधिक लगाव तो नहीं था। किंतु यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह रखती थी यमुना अपने भाई यमराज को घर आने के लिए आमंत्रित करती थी लेकिन व्यस्तता के कारण यमराज उनके घर नहीं पहुंच पाते थे वास्तव में यह त्यौहार पूरे भारत में भाई और बहन के असीम प्रेम के रूप में मनाया जाता है।

मंडल ब्यूरो चीफ अयोध्या
तेज बहादुर शर्मा।

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